Monday, May 31, 2010

बेटा और देवर-1

प्रेषिका : बीना
मेरी योनि के अन्दर घूमती उंगली ने मुझे मदहोश कर रखा था... स्स्स्स्सईई मेरी सिसकारी निकलने लगी... वो धीरे-धीरे उन्गली अन्दर बाहर कर रहा था... पर मैं इतनी मस्त हो गई थी कि ना तो एक उंगली से गुजारा हो रहा था और ना ही इतनी कम स्पीड में अब मज़ा आ रहा था....
आज इनको क्या हो गया ? इतनी देर से एक ही उंगली से करे जा रहे थे और वो भी इतनी धीरे-धीरे ..... मेरी कामुकता इतनी बढ़ गई थी कि मैंने अपने आप ही उनकी दो उंगलियां पकड़ कर अपनी चूत में घुसेड़ कर जोर-जोर से पेलने के लिये जैसे ही उनका हाथ पकड़ा ...... मैं सन्न रह गई....यह तो बड़ा मुलायम सा हाथ था... मेरे पति का हाथ तो घने बालों से भरा पड़ा है......
तभी मेरा दिमाग झन्नाया....
मुझे याद आया कि मैं तो अपने एक रिश्तेदार के घर शादी में शामिल होने आई थी और खाली जगह देखकर कोने में सो गई थी। कमरे में अन्धेरा था, मैंने उसके हाथ को पकड़ कर दूर करना चाहा लेकिन मैं उसकी ताकत के सामने हार गई, मेरा बदन कांपने लगा।
इस कमरे में तो मेरे आने से पहले तीन औरतें और एक छोटा सा बच्चा सो रहा था और कमरे में लाइट जल रही थी तो फ़िर यह कौन है? कब अन्दर आया और इतनी हिम्मत कर ली कि मेरे साथ यह सब......?
मैं उसको पहचानने के लिये अपना हाथ उसके चेहरे पर ले गई तो वो मेरे कान में फ़ुसफ़ुसाया- मम्मी, मैं हूं बिल्लू !
मैं सन्न रह गई......... यह मेरा अपना 12वीं में पढ़ने वाला 18 साल का बेटा ही मेरी चूत में उंगली घुसेड़ कर मज़े लूट रहा था।
कमीने, यह तू क्या कर रहा है... शरम नहीं आती...अपनी माँ के साथ....? चल हटा अपना हाथ ! मैं उसके कान में फ़ुसफ़ुसाई।
मम्मी, प्लीज... अब रहने दो ना... मज़ा आ रहा है।
मैंने उसको समझाने की पूरी कोशिश की लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उसको जो कुछ भी करना है जल्दी करने को कहा। बिना वक्त गवांये वो मेरे ऊपर आया... मेरी गीली चूत पर अपना लण्ड रखते ही धक्के मारने चालू किये। 6-7 धक्कों के बाद वो शान्त हो गया।
अगले दिन 11 बजे ऑटो से मैं और बबलू घर आये, रास्ते में हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई। चूंकि उस दिन वर्किंग-डे था सो बबलू के पापा पडोस में चाबी देकर गये थे, पड़ोस से चाबी लेकर दरवाजा खोलने के बाद मैं अपने बेडरूम में गई और बबलू अपने रूम में। बैग से कपड़े निकालकर मैं बाथरूम में चली गई।
कपड़े धोने और नहाने के बाद मैं हमेशा की तरह पेटिकोट और ब्लाउज पहनकर अपने बेडरूम में साड़ी पहनने के लिये गई। साड़ी पहनने से पहले मैं आगे की तरफ़ झुककर तौलिए से अपने बाल सुखा रही थी कि तभी किसी ने पीछे से आकर मेरी दोनों चूचियाँ जोर से भींच ली, उसका तने हुये लण्ड का स्पर्श मैंने अपनी गांड की दरार पर महसूस किया।
एक सेकेन्ड के लिये चौंकी... फ़िर अहसास हुआ कि बबलू के अलावा घर में कोई और है भी नहीं......
मैंने गुस्से में पलटकर जोर से उसके गाल पर एक जबरदस्त तमाचा जड़ा। उसने मेरी चूचियाँ इतनी जोर से दबाई थी कि मेरे आंसू निकल गये। वो मेरे तमाचे से बौखला गया.... उसका चेहरा लाल हो गया..... और जोर से चिल्लाकर बोला- चाचा से तो खूब करवाती हो... चिल्ला चिल्लाकर... मैं भी तो वही कर रहा था...... फ़िर मारा क्यों...??
उसकी बात सुनकर मेरी जबान कुछ कहने से पहले मेरे हलक में अटक गई... मैं फटी आंखों से उसको देखती रही... मैं अवाक रह गई।
बोलो ना ! अब क्यों नहीं बोलती कुछ ? उसने गुस्से में कहा।
थोड़ी देर खामोश रहने के बाद मैंने थोड़े गुस्से और थोड़े प्यार के लहजे में उससे कहा- क्या बकवास कर रहा है तू? कौन चाचा और कैसा चाचा....?
सहारनपुर वाले चाचा और कौन.... जब वो पिछली बार जब वो दोपहर में आये थे, मैंने सब अपनी आखों से देखा था... पहले दिन अपने बेडरूम में और आपने जबरदस्ती उनको एक दिन और रोका था..... वही करने के लिये और दूसरे दिन गेस्ट रूम में........! मैंने दोनों दिन देखा था और उनके जाने के बाद आप बहुत उदास भी हुई थी। उसने उसी गुस्से वाले अन्दाज में कहा।
मेरे पैर काम्पने लगे.... मैं सिर झुकाकर बेड पर बैठकर सोचने लगी... अब क्या करूं...???
उसको समझाने के लिये हिम्मत कर मैंने उसकी तरफ़ देखा..... पर उसकी निगाहें दूसरी जगह टिकी देख मैंने अपने पेट के नीचे देखा... मेरे पेटिकोट के नाड़ेघर के पास के कट की सिलाई उधड़ी होने के कारण मेरा पूरा झांट प्रदेश साफ-साफ दिखाई दे रहा था।
मैं जल्दी से उस जगह पर अपना हाथ रखकर खड़ी हुई और पेटीकोट को घुमाकर नाड़ेघर को साइड में कर उसको पकड़कर अपने साथ बिस्तर पर बिठाया और उसको समझने लगी- देख, देवर-भाभी और जीजा-साली के रिश्ते में कभी-कभी ऐसा हो जाता है.... पर तू तो मेरा बेटा है.... मां-बेटे के रिश्ते में यह सब पाप होता है... गाली भी होती है।
झूठ मत बोलो मम्मी ! राजू भी तो अपनी मम्मी के साथ कभी-कभी करता है। बबलू ने झल्लाकर कहा।
(राजू- बबलू की बुआ का लड़का जो बबलू से एक साल छोटा है)
इस बात से मैं और चौंकी और पूछा- तुझे कैसे पता ये सब....?
वो जब रात को सोने की जगह नहीं मिली तो राजू और मैं उस कमरे में गये जहाँ आप सो रही थी... आपका एक पैर मुड़कर एक साइड में और दूसरा पैर सीधा था, जिस वजह से आपकी साड़ी पूरी ऊपर सरकी हुई थी और पूरी नंगी लेटी हुई थी। मैंने जल्दी से लाइट बन्द की और राजू का हाथ पकड़कर नीचे ले गया। राजू ने नीचे आकर कहा कि आपकी चूत बहुत सुन्दर है और उसकी मम्मी की तरह काली नहीं है।
जब मैंने उससे पूछा कि तेरी मम्मी तो गोरी है तो फ़िर उनकी चूत काली कैसे हो गई? और तुझे कैसे पता?
तो उसने बताया कि पहले वो छुप-छुपकर गुसलखाने में नहाते समय दरवाजे के नीचे की झिरी से देखता था और एक दिन उसकी मम्मी ने उसको पकड़ लिया और तब से वो कभी कभी अपनी मम्मी के साथ वही करता है जो चाचा ने आपके साथ किया था। उसने यह भी बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले जडेजा अंकल के साथ भी उसकी मम्मी वही करती है।
उसने मुझसे कहा कि मैं ऊपर जाकर चुपचाप आपकी बगल में लेट जांऊ और अपनी उंगली में थूक लगाकर आपकी चूत में डालकर धीरे-धीरे घुमाऊँ ..... फ़िर आप अपने आप मुझे अपने ऊपर लिटाकर करने को कहोगी... लेकिन आपने तो ऐसा कुछ नहीं किया.... उलटा रात को मेरा हाथ झटक दिया और अभी मेरे गाल पर तमाचा जड़ दिया...क्यों..??
अब मैं उसको क्या जवाब देती.......? कुछ समझ में नहीं आया। अपनी उस गलती को याद करने लगी जब घर में उसके होते मैंने अपने देवर से............। पर मैं करती भी क्या.....? मेरे देवर का लण्ड था ही ऐसा जो एक बार देख ले चुदाये बिना रहना मुश्किल और एक बार चुदवा लिया तो जहन में आते ही चूत कुलबुलाने लगती है।
मेरी शादी के चार या पांच महीने बाद एक दिन सहारनपुर में उन्हीं के घर में मौका पाकर उसने मुझसे सम्बन्ध बनाने चाहे.....
मेरे टालमटोल करने के बावजूद उसने एक रात मेरे कमरे में आकर अपनी हसरत पूरी करनी चाही.....और पूरी हो भी गई लेकिन बेचारे को आधे में ही भागना पड़ा क्योंकि दूसरे कमरे में लाइट जलने पर वो मेरे ऊपर से उतरकर बाहर भाग गया था। जिस कमरे में मैं सोई थी और बगल वाले कमरे (देवर और उनकी बहन का कमरा) के बीच में छत के पास एक रोशनदान था जहाँ से लाइट जलने का पता चला।
उस रात जो आठ-दस धक्के मेरी चूत पर पड़े थे उनको मैं आज तक नहीं भूल पाई हूँ। ऐसा लग रहा था जैसे एक के पीछे एक दो-दो लण्ड अन्दर जा रहे हों और बाहर निकल रहे हों। एक दिन पहले पीरियड से फ़्री होने के कारण ठुकाई के लिये आतुर मेरी चूत और ऊपर से आठ-दस धक्कों की रगड़ से और भड़की आग की तड़प से मैं पूरी रात सो नहीं पाई थी।
एक हफ्ता वहाँ रहते हुये हम दोनों ने बहुत कोशिश की लेकिन असफलता ही हाथ लगी और एक दिन मेरे पति आकर मुझे अपने साथ दिल्ली ले आये।
आज से दो महीने पहले (जिस दिन की याद बबलू ने आज दिलाई) दोपहर को खाने के वक्त वो हमारे घर आये अपनी लड़की से कोई कोर्स करवाने के सिलसिले में मेरे पति से सलाह लेने !
उसको देखते ही मेरी काम पिपासा जाग गई.... अठारह साल पहले पड़े आठ-दस धक्कों की रगड़ यात आते ही चूत रानी मस्तानी हो चली थी। मेरे पति उस वक्त आफिस गये थे। बबलू खाना खाकर अपने कमेरे में लेटा था। मैंने दो थालियों में खाना परोसकर डायनिंग टेबल पर रखा और दोनों (देवर और मैं) बैठकर खाना खाने लगे।
खाना खाते-खाते मेरी निगाह बार-बार उसकी टांगों के बीच अटक जाती, जिसे भांपकर देवर ने मेरे पैर पर पैर मारा.... मैंने जब उसकी तरफ़ देखा तो उसने मैक्सी ऊपर सरकाने का इशारा किया।
मैंने आंख और सिर हिलाकर नहीं में इशारा किया तो वो कुर्सी और नजदीक खिसकाकर अपना एक पैर मेरी मैक्सी के अन्दर डालकर मेरी टांगों के बीच में लाकर पैर के अंगूठे से मेरी चूत टटोलने लगा..... और उसके आग्रह पर मैंने कुर्सी से उठकर अपनी मैक्सी ऊपर कर उसको अपनी ......... के दर्शन कराये और बैठकर खाना खाने लगी।
मेरा देवर तेज दिमाग वाला इंसान है, उसने लुंगी के नीचे कुछ नहीं पहना था, वो बीच में से लुंगी फ़ैलाकर अपने अजूबे लण्ड को निकालकर मेरी तरफ़ देखते-देखते खाना खाने लगा। खाना खत्म करने के बाद मैं किचन से आम लेकर आई।
किचन का काम निपटाकर मैं बाहर आकर उसके पास बैठकर उसके घर परिवार के बारे में जानकारी लेने लगी। तुम बैठक में जाकर सो जाओ, मैं अपने कमरे में जाकर थोड़ा सुस्ता लूं ! कहते हुये जैसे ही मैं उठी, उसने खींच कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया, एक हाथ से मेरी एक चूची दबा दी।
पागल हो गये हो देवर जी ! जवान लड़का घर में है.... छोड़ो ना...... मैंने विनती की।
उसने मुझे छोड़ दिया। मैं उठकर अपने कमरे में चली गई। अन्दर जाकर मुझे पछतावा होने लगा। अठारह साल बाद ऊपर वाले ने मौका दिया था और मैंने गंवा दिया। मैं कुछ सोचकर पलटी ही थी कि देवर ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया।
मन ही मन बल्लियों उछलते हुये मैंने नाटक करते हुये कहा- रुको देवर जी, मैं बबलू को देखकर आती हूँ।
उसकी चिन्ता तुम मत करो मेरी जानेमन भाभी..... मैं देखकर आया हूँ... वो अपने बिस्तर पर उल्टा होकर सो रहा है।
छोड़ो तो सही.....दरवाजा तो बन्द कर दूं- मैंने कहा।
देवर बाहों में पकड़े पकड़े मुझे दरवाजे के पास लाया, अपने आप कुन्डी बन्द की और उसी अवस्था में लेकर बिस्तर पर आया.... मुझे लिटाया..... मेरी मैक्सी ऊपर सरकाकर मेरे पैरों को फ़ैलाया और एक झटके में मेरी चूत की चुम्मी लेकर बोला- सच भाभी, भगवान की कसम, इन अठारह सालों तक कैसे कैसे बरदाश्त किया.... उस दिन जल्दी जल्दी में कुछ मज़ा नहीं आया और मैंने तो तुम्हारी फ़ुद्दी के दर्शन भी नहीं किये थे।
मेरी चूत रसभरी की तरह अन्दर से भर चुकी थी, मैं किसी तरह भींच भींच कर पानी को बाहर निकलने से रोक रही थी। मैं आज तसल्ली से उसके लण्ड को देखना चाहती थी कि उसका आकार ऐसा क्यों है..??
मैं उठकर बैठते ही अपना हाथ लम्बा कर उसकी लुन्गी के अन्दर ले गई.... उसके लण्ड को पकड़कर लुन्गी से बाहर निकालकर नजदीक से देखने लगी।
उसके लण्ड का टोपा नुकीला, टोपा खत्म होते ही (रिंग के पास से) फूला हुआ, 2 1/2 इंच के बाद जैसे 1/2 इंच की गांठ बंधी हो (पूछने पर देवर ने बताया कि बचपन में फोल्डिन्ग पलंग में उसकी लुली फंस गई थी, सात टांके आये थे, जिस कारण टांके वाली जगह से वो एक दम पतला और गिठा के आकार का हो गया था), उसके बाद तीन इंच पीछे की तरफ़ मोटा और जड़ के पास से आधा इंच पतला यानी कुल मिलाकर करीब सात इंच लम्बा।
आज मुझे पता चला कि जिस रोज अठारह साल पहले इसने पहली बार मेरी चूत में डाला था उस वक्त मुझे क्यों अजीब लग था।
मेरे हाथ में ही उसका लण्ड झटके मारने लगा... इधर बैठे-बैठे मेरी चूत से फ़क से पानी पेशाब की तरह बाहर निकल गया और मेरे नीचे बेड सीट गीली हो गई। मेरी वासना पूरी तरह जाग चुकी थी...मैं बेड पर लेटी और बोली- आओ ना देवर जी.... जल्दी करो.... कहीं बबलू जाग ना जाये।
मैं आज अठारह साल पहले की भड़की आग को शान्त करना चाहती थी तसल्ली से।
देवर ने नीचे खड़े-खड़े मेरी चूत पर हाथ फ़ेरते हुये एक उंगली अन्दर सरका दी।
मैं बरदाश्त नहीं कर पाई.... मैं समय बरबाद नहीं करना चाहती थी..... उसको जोर से खींचते हुये मैंने अपने ऊपर लिटाकर कहा- बड़े कमीने हो तुम.... ! करते क्यों नहीं...??
इतनी जल्दी क्या है मेरी जान....? तुमने तो मेरा तसल्ली से देख लिया... मैं भी तो देखूँ अपनी भाभी की मस्तानी फ़ुद्दी को.......वो बड़े इत्मिनान से बोला।
मेरी चूत से लगातार बूंद-बूंद कर पानी रिस रहा था। हर औरत समझ सकती है कि ऐसा कब होता है और ऐसा होने पर अगर लण्ड नहीं मिले तो वो कुछ भी कर सकती है... कुछ भी। पर मैंने प्यार से काम लेना ही ठीक समझा और उसकी छाती पर उंगली फेरते हुए कहा- एक बार कर लो ना...... फ़िर जी भर के देख लेना मेरे राजा।
क्या कहा भाभी... जरा एक बार फिर बोलना जरा ! देवर बोला।
मेरे राजा... एक.... बार..... कर लो..... मेरी नीचे वाली तड़प रही है... उसके बाद जी भर कर जैसे मर्जी हो देखते रहना.... आधा बेशर्मी और आधा शरमाते हुये मैंने कहा और उसकी छाती में अपना मुँह छुपा लिया।
देवर- हाय मेरी जान.... मुझे पता है तुम्हारी फ़ुद्दी टपक रही है....... एक बार देखने दो...
मुझे खीज सी होने लगी थी।
क्या है देवर जी... तंग मत करो ना.... बोला तो है एक बार कर लो फिर जितना मर्जी देख लेना... कहते हुये मैं लेटे-लेटे नीचे से अपने आप को एडजस्ट करने के बाद फ़िर कहा- अब नहीं सहा जा रहा है देवर जी... क्यों मेरा मज़ा खराब कर रहे हो .... करो ना...... नहीं तो मैं ऐसे ही झड़ जाऊंगी......
अच्छा यह बात है ! कहते हुये देवर ने पहले मेरी चूत के बाहर रिसे प्री-कम से अपने लण्ड के टोपे को गीला किया और फ़िर रखते ही गपा.....क से घुसेड़ दिया।
मैं शायद इसी वक्त के लिये अटकी थी....मैं तो नीचे से फ़ुदकने लगी... आआआआ अभी आधा लण्ड ही अन्दर घुसा था कि मैं तो झड़ गई। मेरा मूड खराब हो गया.....।
मेरा बिगड़ा चेहरा देख देवर बोला- अब क्या हुआ..? जो तुम चाहती थी, वो तो हो गया फ़िर.....
बहुत गन्दे और कमीने हो तुम देवर जी ! मैंने कहा। कब से बोल रही थी... तुम हो कि माने ही नहीं, अब तुम भी जल्दी से अपना पानी झाड़ो और दूसरे कमरे में चले जाओ।
पर हुआ क्या, कुछ बताओगी भी? देवर ने पूछा।
मैं तुम्हारे डंडे के साथ मज़े लेना चाहती थी पर तुमने तो सारा काम ही खराब कर दिया ! मैंने कहा।
बस इतनी सी बात......! अरे मेरी जान..... ! सब्र करो ! ऐसा मज़ा दूंगा कि भाई साहब को भूल जाओगी और सपने में भी याद करोगी तो चूत से पानी टपकेगा ! देवर ने कहा।
मेरे ऊपर से उतरने के बाद उसने मेरी मैक्सी से मेरी चूत को साफ़ किया और दोनो पैरों के बीच में आने के बाद मेरे चूतड़ों के नीचे अपनी दोनों हथेलियों को रखकर अपना मुँह मेरी चूत पर रखकर चाटने लगा। कुछ ही पलों में मैं उत्तेजित हो गई... चूत चटवाने का यह मेरा पहला अनुभव था..... लाजवाब अनुभव !
मेरी चूत के अन्दर फ़िर से सरसराहट होने लगी।
आगे क्या हुआ ? जानने के लिए कहानी का अगला भाग !


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बेटा और देवर-2

प्रेषिका : बीना
पहले भाग से आगे -
देवर ने मेरी चूत के दाने (भग्नासा) को मुँह में लेकर कुल्फ़ी की तरह चूसा...
स्सीईईईईईई हाआआ देवर जी स्सीईईईईईईईईई बस करो स्स्सीईईईईई देवर जी ब्ब्ब्बस्स्स्स्स्स्स्स करो ! मैं बुदबुदाई।
देवर ने दाने को छोड़ा और जीभ से नीचे से ऊपर को चाटने लगा। जैसे ही उसकी जीभ मेरे दाने से टकराती, मेरे मुँह से अपने आप स्स्सीईईईई हाआआआआआ निकलता। मैं फ़िर से झड़ने के लिये तैयार हो गई तो मैंने देवर को रोक कर कहा- एक मिनट रुक जाओ ना... मैं फ़िर से बिना उसके ही झड़ जाऊंगी।
अपना लण्ड बाहर निकालकर....क्या बात है भाभी इतनी जल्दी....? देवर ने कहा।
मैंने उसको बताया कि मल्टिपल डिस्चार्ज की वजह से मेरे साथ ऐसे होता है, तुम्हारे भैया के साथ भी उनके निपटने से पहले मैं दो-तीन बार झड़ जाती हूं।
फ़िर तो आज सच में मज़ा आयेगा ! देवर ने कहा।
उसने यह भी बताया कि देवरानी तो कभी कभार ही झड़ती है वरना उसे ही फ़ारिग होकर उतरना पड़ता है।
मेरी मैक्सी और ऊपर सरकाकर मेरी एक चूची मुँह में लेकर वो चूसने लगा।
स्स्स्शाआआआआआ देवर जी....मत चूऊऊऊसो स्सीईईईईई।
देवर ने मेरी चूची छोड़ दी और मेरे ऊपर से उतरकर बगल में लेटकर बोला- ठीक है भाभी ! तुम मेरे ऊपर आओ और अपने हिसाब से जैसे चाहो वैसे करो.....।
मैं पलटकर उसके ऊपर आ गई। दोनों पंजों के बल बैठते हुये मैंने उसके लण्ड को पकड़कर छेद पर रखकर नीचे को जोर लगाया, सटाक से आधा लण्ड अन्दर सरक गया, धीरे-धीरे सरकते हुये मैंने पूरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया लेकिन ऊपर उठते हुये मेरी सिसकारी निकल गई। उसके लण्ड के नीचे के मोटे हिस्से से सरककर जैसे ही टांके लगे हिस्से के पास पहुंचते ही चूत का मुँह सिकुड़ जाता और ऊपर सरकने पर चूत का छेद फ़िर से फ़ैलने लगता और सटक से लण्ड बाहर निकलने पर छेद फ़िर सिकुड़ जाता। फ़िर से नीचे बैठने पर यही प्रक्रिया होने से दुगुना मज़ा आने लगा लेकिन थोड़ी ही देर में मेरी जांघों में दर्द होने लगा। दर्द के बारे में बताने पर देवर मुझे उसी पोज में अपने ऊपर लिटाकर खुद ही नीचे से धक्के मारने लगा।
आआआ स्स्सीईईईईई .........ऊओ ओ ओ ओ स्स्सीईईईईईई......देवर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी...... हाआआआ देवर र र र र र जी ईईईईईईईईईई !
मज़े में मेरे चूतड़ भी हिलने लगे और फ़क फ़का कर मैं दुबारा झड़ गई।
देवर ने मुझे अपने ऊपर से उतारकर साइड में लिटाया और मेरे ऊपर आकर बारी-बारी से मेरी चूचियाँ चूसने लगा। दस पन्द्रह मिनट में बाद फ़िर से मेरी कामवासना जागी तो देवर ने लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ कर मेरी चूचियाँ चूसते हुये अन्दर घुसे लण्ड पर झटके मारने लगा।
देवर ने पूछा- मज़ा आ रहा है भाभी....?
कभी कभी आ रहा है, जब वो अन्दर टकरा रहा है ! मैंने कहा।
देवर ने बेड पर पलटकर मुझे उल्टा कर घोड़ी बनाकर पीछे से घोड़ा बनकर पेलना शुरू किया।
यह स्टाइल बहुत गजब का था, मेरे पति ने कभी भी इस तरह नहीं किया था। इन अठारह सालों में मेरे पति ने साधारण तरीके से या कभी कभी मेरी दोनों टांगें अपने कंधे पर रखकर ही चोदा था। दूसरे तीसरे धक्के में ही मेरा चिल्लाना शुरू हो गया। एक तो देवर के लण्ड पर टांके की वजह से दो भागो में बंटा होने के कारण हर बार लगता था जैसे एक के बाद एक दो लण्ड बारी बारी से अन्दर बाहर हो रहे हों, दूसरा पूरा लण्ड अन्दर जाते गर्भाशय से टकराता और बाहर दाने पर दबाव पड़ते ही मुँह से स्स्सीईईईईई हाआआ निकल जाता।
हर धक्के के साथ मेरी चूत से हवा भी बाहर निकलने के कारण पर र र र र र की आवाज भी निकलने लगी। लगातार आधा घन्टा देवर ने मुझे इसी पोज में चोदा..... इतना जबरदस्त मज़ा आने के बाद भी मैं झड़ी नहीं।
देवर का पसीना मेरी पीठ के ऊपर टपकने लगा। देवर ने मेरी मैक्सी निकालकर मुझे नंगा कर बेड से उतारकर बेड की साइड में रखे एक बड़े से लोहे के बक्से के सहारे आधा झुकाकर खड़ा किया, मेरा एक पैर उठाकर बेड पर रखा और अपने बदन पर पहनी एक मात्र बनियान निकालकर मेरे पीछे से आकर मुझे बेड के कोने में रखे ड्रेसिंग टेबल के शीशे में देखते रहने को कहा। मेरी टांगों के नीचे आकर पहले तो उसने आठ-दस बार मेरी चूत को चाटा......
शीशे में देखते हुये अजीब सा लग रहा था। फ़िर मेरे पीछे खड़ा होकर उसने मेरी चूत में आधा लण्ड घुसेड़ कर मेरी दोनों चूचियों को पकड़ते हुये बाकी का आधा लण्ड अन्दर किया और इसी तरह पांच सात मिनट तक चोदने के बाद वो मुझे और झुकाकर मेरी कमर पकड़कर सटासट सटासट चोदने लगा।
ओ मां...... कितना मज़ा आ रहा था मैं यहां बयान नहीं कर सकती...।
जैसे ही उसका लण्ड मेरी चूत से बाहर आता..इससे पहले कि वो धक्का मारकर अन्दर करता....मदहोशी में मैं ही पीछे को धक्के मारकर स्स्सीईईईई हा आ आ करते हुये अन्दर लेने लगी। मैं झड़ने वाली थी.... मेरा एक हाथ अपने आप उसकी जान्घ पर गया और हर धक्के में उसकी जान्घ को पकड़कर अपनी तरफ़ खींचती और पीछे को धक्का मारती..... आआआ स्सीईईई देवर जीईई मेरा आआ हो.... स्सीईईई हो.... आआस्स्सीईईईई हो.......गयाऽऽऽ देवर जीईईईऽऽऽ।
मेरे दोनों पैर काम्पने लगे। देवर ने बेड पर रखा मेरा पैर नीचे किया, दोनो पैरों को थोड़ा फ़ासले पर किया और मेरी कमर पकड़कर पहले तो आहिस्ता आहिस्ता चोदा फ़िर जैसे ही स्पीड में चोदने लगा। मैंने शीशे में देखा मेरी चूत से सफ़ेद सफ़ेद टपक रहा था।
देवर हूं...हूं...हूं की आवाज निकालते हुये जोर जोर के धक्के मार रहा था.. मेरी चूत के दाने पर दर्द होने लगा.... इससे पहले कि मैं उसको बताती उसने ओ ओ ओ करते हुये इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरे हाथ फ़िसल गये मैं छाती के बल जोर से बक्से के ऊपर पसर गई.... मेरी चूत से एक-दो इंच ऊपर हड्डी का हिस्सा बख्से के कोने से टकराया...मैं दर्द के मारे चिल्लाई- उईईई मां मर गई....। देवर ने तीन चार और धक्के उसी अवस्था में मारे और पच पच पच पच पच करके अपने वीर्य की पिचकारियाँ मेरी चूत के अन्दर मार दी। जब उसने अपना लण्ड बाहर खींचा तो चूत से पर र र र र्र र्र र्र की आवाज के साथ साथ ढेर सारा वीर्य निकलकर फ़र्श पर गिर गया। बड़ी मुश्किल से मैं बक्से के ऊपर से उठी.....
मैंने देखा मेरी चूत से थोड़ा ऊपर बक्से के कोने का निशान पड़ गया था। देवर ने देखा तो उसने मुझे बेड पर लिटाया और हथेली से उस निशान के ऊपर मालिश करने लगा। चुदाई का असल मज़ा मैंने आज लिया था....भले ही अब चूत में भयंकर दर्द हो रहा था।
मैंने बेड के ऊपर पड़ी मैक्सी से पहले अपनी चूत साफ़ की फ़िर देवर की वीर्य से सनी झांटों और लण्ड को तथा उसके बाद फ़र्श पर टपके वीर्य को साफ़ करने के बाद अलमारी से अपनी दूसरी मैक्सी निकालकर पहनी।
देवर ने अपनी बनियान पहनकर नीचे लुन्गी लपेटी और बेड पर बैठते हुये मुझे अपनी गोद में लेकर मेरे गालों और होंठों को चूमते हुये बोला- भाभी, यह अहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगा..... पहली बार मैंने असली मज़ा लिया है। रात को भैया से मशवरा लेने के बाद मैं कल सुबह सुबह निकल जाऊंगा। फ़िर जिन्दगी में ये अवसर कभी नहीं आयेगा भाभी, मैं दस मिनट तुम्हारे साथ इसी बिस्तर पर लेटना चाहता हूं.... इन्कार मत करना भाभी...।
मैं भी एक बार और मज़ा लूटना चाहती थी लेकिन वक्त बहुत हो गया था... बबलू के उठने का डर भी था सो मैंने देवर से कहा- अगर मुझ पर इतना ही प्यार आ रहा है तो फ़िर कल दिन तक एक बार और मज़े लेकर शाम तक निकल जाना।
सच भाभी... कहते हुये वो लगातर दो-तीन मिनट तक मेरे गालों, होठों, माथे और आँखों को चूमता रहा जिससे मैं भी रोमांचित हो गई और उसी तरह उसको भी चूमने के बाद उसको समझाकर उसके कमरे में भेजा और बाथरूम से फ़ारिग होकर मैं बेड पर लेटी, अपनी आखें बन्दकर देवर के साथ लिये मज़े को कैद करती चली गई।
दूसरे दिन मेरा बेटा साढ़े सात बजे स्कूल चला गया और नौ बजे पतो ऑफ़िस। देवर ने पति से झूट बोला कि वो देवरानी के लिये बाजार से कुछ कपड़े खरीदकर दोपहर को निकल जायेगा।
मेरे पति के जाने के बाद देवर ने मुझे किचन से खींच कर बेडरूम में लेजाकर अपनी बगल में लिटाया और मुझे चूमते चाटते, मेरी चूचियों को मैक्सी के बाहर से ही भींचते हुये अपनी और देवरानी के सेक्स के बारे में बताने लगा। उसके अनुसार देवरानी बिल्कुल भी सैक्सी नहीं है...वो शुरू से ही सेक्स से बचती फ़िरती है...कभी भी उसने देवर के साथ सेक्स में सहयोग नहीं किया।
उसके पूछने पर मैंने भी बताया कि मेरे पति सेक्स के मामले में हर तरह से सक्षम हैं...पूरी तरह सन्तुष्ट करते हैं लेकिन देवर की तरह चूत चाटकर, घोड़ी बनाकर अलग अलग तरह से नहीं करते हैं।
बातचीत करते करते देवर ने अभी मेरी मैक्सी ऊपर सरकाकर मेरी चूत पर हाथ फ़ेरना शुरू किया ही था कि दरवाजे की घन्टी बज गई। हड़बड़ाहट में भागकर मैंने बाहर जाकर बरामदे का दरवाजा खोला तो सामने बबलू को देखकर मैं दंग रह गई।
दरवाजे पर खड़े खड़े मैंने पूछा- क्या हुआ..? स्कूल नहीं गया क्या...?
बबलू झुंझला कर बोला- अन्दर भी आने दोगी कि नहीं मम्मी, मेरे सिर में जोर का दर्द हो रहा है !
बोलते हुये वो अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गया। मैंने जाकर उसके सिर पर हाथ रखा.....सिर तो ठंडा था।
बबलू बोला-- मम्मी, कोई दवाई हो तो दे दो और दरवाजा बन्द कर दो, मैं सोऊंगा।
मैंने उसको एक सेरिडान की गोली दी और बाहर आते हुये उसके कमरे का दरवाजा भी भेड़ दिया।
मेरा मन खराब हो गया गया... मैं देवर के साथ बलात्कार वाले अन्दाज में अपने आप को छुड़ाते हुये चिल्ला चिल्ला कर चुदवाना चाहती थी। मैं देखना चाहती थी कि कैसे कोई मर्द किसी औरत को बिना उसकी इच्छा के चोद सकता है और इसमें कितना मज़ा आता है......... पर बबलू तो सारा मज़ा ही किरकिरा कर दिया।
मैं बरामदे का दरवाजा बन्दकर गहरी सोच में डूब कर खड़ी हो गई कि अब तो कल की तरह चुदवाना भी मुश्किल हो गया है.....
तभी देवर मेरे बेडरूम की खिड़की से इशारा कर मेरा ध्यान हटाया और मैं उसके पास चली गई। उसके पूछने पर मैंने उसको अब अपनी योजना के बारे में बताया तो वो हंसने लगा और बोला- क्या भाभी.... यह तो अब भी हो सकता है ना।
मैंने पूछा- कैसे?
देवर ने याद दिलाई कि बाथरूम के साइड वाले गेस्ट रूम में जाकर कर सकते हैं। बेटे के कमरे तक वहाँ से कोई आवाज भी नहीं आयेगी लेकिन हमें दोपहर के खाने के बाद बेटे के सोने तक इन्तजार करना पड़ेगा। देवर चाबी लेकर गेस्ट रूम में ठीक ठाक करने चले गये और मैं रसोई का काम निपटाने।
काम निपटाकर मैं बेटे को देखने गई...वो सो रहा था। मैंने उसको दोपहर के खाने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कुछ भी बना लो पर दो बजे से पहले उसको डिस्टर्ब ना करूं। सरसों का तेल और पानी की मल्लम से मैंने बबलू के सिर पर थोड़ी देर मालिस की और उसको ये बोलकर कि मैं थोड़ी देर के लिये पड़ोस में जा रही हूँ, तेरे चाचा यहीं हैं, लौटकर खाना बनाऊँगी...
उसके कमरे दरवाजा खींचकर बाहर आई, किचन में जाकर तेल से सने हाथ को अपनी चूत पर साफ़ किया और हाथ साफ़ कर गेस्ट रूम गई। दरवाजे की कुन्डी बन्दकर देवर से बोली- तुमने अपनी माँ का दूध पिया तो करके दिखाओ.......?
देवर बेड पर लेटा था, वो उठकर बैठ गया और मेरी तरफ़ हैरानी से देखने लगा।
मैंने एक झटके में अपनी मैक्सी ऊपर उठाकर नीचे कर कहा- देख क्या रहे हो...? गांड में दम है तो आओ।
देवर झटके से उठकर मेरी तरफ़ लपका.....
मैं भागकर बेड की दूसरी तरफ़ भाग गई। थोड़ी ही देर में मैं देवर की गिरफ़्त में आ गई, बेड पर पटकने के बाद वो मेरी मैक्सी ऊपर सरका कर मेरी टांगे चौड़ी करने की कोशिश करने लगा और मैं अपना बचाव।
काफ़ी देर की उठा पटकी के बाद आखिरकार मैं थक गई थी, मुझ में बचाव करने की हिम्मत नहीं रही और मुझे चित्त कर वो मेरे ऊपर मेरी टांगों के बीच में आ गया। हंसते हुये अपनी कामयाबी पर गर्व करते हुये उसने मेरी चूत पर लण्ड रखकर जैसे ही धक्का मारा मैंने जोर लगाकर चूत को भींच लिया। पता नहीं उसने कितनी कोशिश की पर लण्ड चूत के अन्दर नहीं कर पाया। दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे।
देवर ने एक बार फ़िर मेरी चूत पर अपना लण्ड सटाया और मेरी चूची को मुँह में भरकर जोर से दांत गड़ा दिये... मैं दर्द के मारे उचक गई.... और चूत ढीली पड़ते ही सटट्टाक से लण्ड एक ही बार में पूरा अन्दर घुस गया।
देवर बोला- अब क्या करोगी मेरी जान....
मैंने शांत रहते हुये कहा- अब मैं क्या कर सकती हूँ... जो कुछ करोगे तुम ही करोगे.....।
मेरे ऐसा बोलते ही वो धीरे धीरे हिलने लगा और मौका पाकर मैं नीचे से एक तरफ़ सरक गई और बेचारा फ़िर से लण्ड अन्दर डालने की कोशिश में लग गया।
यहाँ पर मैं संक्षेप में बता दूँ कि तीन घन्टे तक हमने चुदाई की। पहली बार तो बलात्कार के अन्दाज में, दूसरी बार कामसूत्र के ना जाने कितने आसनों के साथ, तीसरी बार देवर के जाने की वजह से भावुकता में।
देवर की इन तीन बार की चुदाई में मैं शायद सात-आठ बार झड़ी। बीस पच्चीस मिनट एक दूसरे की बाहों में लेटे रहने के बाद मैं किचन में दोपहर का खाना बनाने चली आई और देवर गेस्ट-रूम ठीक ठाक कर नहाने के बाद जाने के लिये तैयार हो गया।
खाना डायनिंग टेबल पर लगाने के बाद मैं बेटे को उठाने गई.... उसका चेहरा लाल हो रहा था... उसकी आँखें भी सूजी हुई थी.... घबरा कर मैंने उसको उठाया और देवर को बताया। देवर ने खाना खाकर उसको डाक्टर के पास ले चलने को कहा। खाना खाते खाते बबलू का चेहरा ठीक हो गया। थोड़ी देर आराम करने के बाद बबलू अपने चाचा को बस स्टाप तक छोड़कर लौटा।
सारे नजारे एक एक कर मेरी आँखों के सामने घूमकर खत्म होते ही मेरी नजर बबलू पर पड़ी उसकी निगाह मेरे ब्लाउज के ऊपर अटकी थी।
मैंने उसको पूछा कि यह बात उसने राजू को तो नहीं बताई तो उसने जवाब दिया कि चाचा वाली बात तो नहीं बताई लेकिन शादी वाली रात की बात बता दी थी।
मैंने उसको समझाया कि ऐसी बातें किसी को नहीं बताया करते... अच्छी बात नहीं होती है। जा अब अपने कमरे में जा।
मम्मी प्लीज.... एक बार चाचा की तरह करने दो ना... सिर्फ़ एक बार !
कर तो लिया था तूने शादी वाली रात.... बस अब नहीं ... मैंने कहा।
नहीं मम्मी वैसे नहीं....बक्से के पास जैसे चाचा ने किया था।
मेरे लाख डराने और समझाने पर भी वो अपनी जिद पर अड़ा रहा तो मैंने उससे वादा लिया कि इसके बाद वो इस बारे में कभी सोचेगा भी नहीं और चाचा या अपने बारे में किसी को भी कुछ नहीं बतायेगा... राजू को भी नहीं।
उसके बाद मैं उसके साथ बक्से के पास उसी अवस्था में जाकर खड़ी हो गई। बबलू ने मेरा पेटिकोट ऊपर सरकाया, नीचे बैठकर अपने चाचा की नकर उतारते हुये मेरी चूत को चाटा फ़िर पीछे से कमर पकड़कर चोदने लगा।
थोड़ी देर बाद बोला-- मम्मी चिल्लाओ ना जैसे चाचा के साथ चिल्ला रही थी।
अब मैं उसको कैसे समझाती कि उस वक्त तो मज़ा आ रहा था... मेरे मुँह से अपने आप आवाज निकल रही थी और इस वक्त एक तो ना चाहते हुये मजबूरी में बेटे से चुदवाने की ग्लानि और पतले से लण्ड से कैसे मज़े की आवाज निकल सकती है।
मैंने उससे कहा- बेटे जल्दी कर.... बेटे के साथ वैसे नहीं चिल्ला सकते और मैंने जानबूझकर अपनी चूत को भींच लिया जिस वजह से उसके लण्ड पर दबाव पड़ा और तीन चार धक्कों में ही हा आआ आआआआ करते हुये वो मेरे से चिपक गया।
उसके हटने के बाद मैं जैसे ही खड़ी हुई, मेरी चूत से पतला पानी जैसा उसका वीर्य टपकने लगा जिसे मैंने अपने पेटिकोट से पोंछा और उसको उसके कमरे में भेजते हुये उसको याद दिलाया कि वो फ़िर दुबारा ऐसा करने की कोशिश नहीं करेगा और किसी से इस बात का जिक्र नहीं करेगा।
मेरी समझ में भी आ गया कि हवस की आग हमेशा आँखें और दिमाग खुले रख आस-पास का मुआयना करने के बाद ही शान्त करने में अकलमन्दी होती है।


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प्यार की चाहत

प्रेषक : जो हन्टर
आइये, आपको एक बार और मैं प्यार की रूहानी दुनिया में कुछ समय के लिये ले चलता हूँ, यहाँ आपको प्यारा नरम सा सेक्स भी मिलेगा, उत्तेजना भी मिलेगी, आपका लण्ड भी खड़ा होगा और आपसी रिश्तो की उल्झन भी नजर आयेगी ...
मैं पन्जिम से मडगांव की तरफ़ आ रहा था। शाम ढल चुकी थी। बादलों के कारण मौसम में ठण्डक आ गई थी। अचानक रास्ते में मुझे एक लड़की नजर आई। वो पंजों के बल उछल उछल कर मुझे रुकने का इशारा कर रही थी। बरसात होने वाली थी। काले बादल सर पर आ चुके थे। ऊंचा सा स्कर्ट पहने और गहरे गले का टॉप पहने कोई मॉडर्न गर्ल थी। मैंने उसके पास ही गाड़ी रोकी ... कार का दरवाजा खोल कर मैंने अन्दर आने का इशारा किया। वो लपक कर सामने बगल वाली सीट पर आ गई।
"थेन्क्स जो ... नाईस ऑफ़ यू ... "
"आप मुझे जानती हैं ... आप का परिचय ... ?"
"मैं शैली ... यहीं पास में होटल में काम करती हूँ ... आप कल शाम को यहाँ रुके थे ना ... "
"ओह हाँ ... मैंने 50 रुपये टिप में दिये थे ... ऐसे मौसम में बाहर नहीं निकलना चाहिये ... "
" रात भर मैं यहाँ क्या करती ... सोचा बाहर आ कर कोशिश करूँ ... देखा, आप मिल गये ना ... यहाँ पास में मन्दिर में रुकना ... मुझे कुछ काम है।" उसने सामने मन्दिर की तरफ़ इशारा किया। बरसात चढ़ी हुई थी, मेरा मन रुकने को नहीं था, बस 50 किलोमीटर ही दूर था मडगांव। फिर भी मैंने मन्दिर की तरफ़ गाड़ी मोड़ ली। बूंदा बांदी शुरू हो गई थी। बादलो की गड़गड़ाहट और तेज बिजलियाँ कौंध रही थी। गाड़ी मन्दिर परिसर में खड़ी करके हम दोनों मन्दिर के अन्दर चले आये।
"जल्दी करना शैली ... "
"बस दो मिनट ... "
इतने में अन्दर से एक लड़का भागता हुआ आया ... उसके हाथ में छाता था और शायद वो घर जा रहा था।
"मन्दिर में कोई नहीं है ... चलो ... " लड़के ने भागते हुए कहा "बारिश जोर की आयेगी ... "
"अरे मुझे पण्डित जी से काम है ... " शैली ने जोर से चीख कर कहा।
" वो नहीं है ... चाबी वहीं हैं ... आप इन्तज़ार कर लो ... " वो तेजी से सीढ़ियां उतर कर चला गया।
"मुझे पता है ... आओ जो ... " वो मुझे देख कर मुस्कराई ...
इतने में बरसात तेज हो गई। हवा में शैली का छोटा सा स्कर्ट बार बार कमर के ऊपर उड़ कर आ रहा था। उसकी छोटी सी पेन्टी में से उसके उभरे हुए चूतड़ साफ़ दिखने लगे थे। मैंने अपना दिल थाम लिया ... साली चुदने लायक है ... मैंने लण्ड को दबा कर समझाने का प्रयास किया। फिर मैंने निराशा से बाहर देखा और रुकने में ही भलाई समझी। मन्दिर के साथ ही पुजारी का कमरा था,हमने पुजारी का कमरा खोला ... और अन्दर आ गये।
आते ही शैली बिस्तर पर लेट गई, लेटते ही उसकी स्कर्ट फिर से ऊपर हो गई। उसकी चिकनी सलोनी गोरी मांसल जांघें चमक उठी। मेरी पैन्ट के ऊपर से लण्ड का उभार देख कर वो भी इतराने लगी और जान करके अपनी टांगें फ़ैला ली। चूत के स्थान पर एक गीला धब्बा उभर आया था।
"शैली , स्कर्ट नीचे कर लो ... सब दिख रहा है।" मैंने झिझकते हुए कहा।
"अच्छा ... तो देखो ना ... कैसी हूँ नीचे से ... " उसने मुझे निमंत्रण देते हुए कहा, अपनी चूत को हाथ से दबाते हुई बोली ... गीला धब्बा और फ़ैल गया ... चूत का रस निकल रहा था।
"तराशी हुई चिकनी जांघे, गोरी सुन्दर् ... छोटी सी पेन्टी ... और उभरी और गीली हुई ... "
"हाय ... " उसने जल्दी से स्कर्ट ऊपर डाल लिया ... "आप तो मेरे अन्दर ही घुसे जा रहे हैं ... "
"आपने पूछा था ना ... कोई दूसरा होता तो ... वो जाने क्या कर डालता ... ये गीली ... "
"और आप कुछ भी नहीं करते क्या ... और गीली क्या ... " खुला न्योता दे रही थी ... अगर मैंने कुछ नहीं किया तो वो समझेगी कि मेरे में कुछ कमी है।
"क्यों नहीं करता ... । जैसे ये आपके बड़े बड़े सेक्सी चूंचे ... और ये गीली चूत ... " मैंने उसके पास जाकर उसके चूंचे दबा दिये।
"रुको ... 5000 रुपये लूंगी ... " मुझे भड़का कर उसने कमाई की दर बता दी।
"मंजूर है ... पर फिर मैं जो चाहूँगा वो करूंगा ... चाहे पिछाड़ी ही मार दूँ !"
"और सुनो ... उसके अलावा, मैं जो चाहूँ वो भी करोगे ना ... आ जाओ ना ... समय कीमती है ... शुरू हो जाओ ... और निकाल दो मेरी हसरतें ... आपकी हसरतें ... " वो बड़े ही प्रोफ़ेशनल अन्दाज में बोली।
"चलो कपड़े उतारें ... शैली" बाहर बरसात पूरा जोर पकड़ चुकी थी।
मैंने अपने कपड़े उतार दिये ... उसके तो कपड़े वैसे ही ना के बराबर थे। मेरा तन्नाया हुआ लण्ड देख कर उसके मुख से अनायास ही निकल पड़ा ...
"माई गॉड ... ... ये लण्ड है या मूसल ... इसका तो पूरा मजा लूंगी मैं तो ... " मुझे समझ में नहीं आया, मेरा लण्ड तो साधारण था, हां खड़े होने के बाद आठ या साढ़े आठ इन्च का हो जाता होगा।
उसकी नंगी चूत गीली थी, हाथ लगाया तो लसलसी सी, चिकनाई से भरी हुई थी ... मेरा हाथ उसने झटक डाला।
"यहाँ खड़े हो जाओ जो ... " खुद एक कुर्सी पर नंगी बैठ गई और मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसके ठण्डे और नरम हाथों ने मेरे लण्ड को और कड़क कर दिया। मेरे लण्ड को वो हल्के हल्के मलने लगी। मुझे मीठा मीठा सा मजा आने लगा। मैंने उसके बाल पकड़ लिये और दूसरे हाथ से उसकी चूची सहलाने लगा। वो कभी कभी मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूस भी लेती थी। मेरा सुपाड़ा उसके थूक से भीग जाता था।
"साला ... चूत में घुसेगा तो मुझे मस्त ही कर डालेगा ... और गाण्ड को तो मजे आ जायेंगे ... "
"शैली, अब जरा मुठ मार के मजा दे यार ... "
"ये लो ... क्या कड़क लौड़ा है ... चूसने में भी मजा आ रहा है ... " और उसने अपने हाथ में लण्ड को ठीक से बांध लिया और जोर से दबा लिया ... ।
"तैयार हो जो ... तेरा लण्ड अब तो गया ... " उसके हाथों ने कस कर हाथ जड़ तक रगड़ा और फिर बाहर तक दबा कर रगड़ मारी ... मुझे लगा कि माल निकाला ...
"हां शैली अब लगा कि मुठ मारा है ... चल जल्दी जल्दी कर ... फिर चुदाई भी तो करनी है ...
"जल्दी क्या है जो ... ये भयंकर बरसात है, सुबह तक तो चलेगी ... तब तक क्या करोगे ... "
और उसका भारी हाथ मेरे लौड़े को रगड़ मारते हुये मुठ मारने लगा। मुझे मस्ती चढ़ने लगी। मुझे आश्चर्य हुआ कि उसके हाथों में इतनी ताकत कहां से आ गई। मेरा जिस्म वासना से भर कर तन गया। लण्ड को मैंने और उभार लिया। शैली जम कर मुठ मार रही थी।
"बस कर शैली ... देख मेरा माल निकल जायेगा ... "
"जो ... निकाल दे माल ... निकाल दे ... मजा आ जायेगा ... " उसने अपने हाथों को और तेज कर दिया। मेरा लण्ड उफ़ान पर आ गया।
"शैली ... रुक जा रे ... देख निकल जायेगा ... "
उसने हाथ रोक दिया और लण्ड को मुँह में ले लिया ... और एक विशेष तरह से लण्ड को मोड़ कर मुठ मारा ... तीन चार स्ट्रोक में मेरी हालत खराब हो गई।
"मा ... दी फ़ुद्दी ... मां चुद गई मेरी तो ... हाय रे ... ओह्ह्ह्ह्ह्ह" और मेरे लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया, वीर्य उसके हलक में सीधा उतर गया और वो गट से पी गई। अब वो मेरे लण्ड को जोर जोर से चूस रही थी, मानो लण्ड की सफ़ाई कर रही हो ... ।
मैं बिस्तर पर लम्बी सांसें भरता हुआ लेट गया। मेरे लेटते ही वो मेरे ऊपर आ गई। और मुझे लिपटा कर चूमने लगी।
"जो मजा आया ना ... तेरा लण्ड मस्त है रे ... मुठ मारने में बहुत मजा आया ... ।"
शैली अपनी चूत मेरे लण्ड पर घिसने लगी ... उसकी शेव की हुई चूत के कड़े बाल मेरे लण्ड पर चुभ रहे थे और खरोंचें मार रहे थे। बड़ा मजा आ रहा था।
"शैली तुमने कहां से सीखी ये सब मस्ती वाली हरकतें ...? "
"यह तो मैं अस्सी नब्बे सालों से कर रही हूँ ... ।" और हंस दी ... "तुम्हें जब सौ साल का अनुभव हो जायेगा ना, तो तुम भी एक्स्पर्ट हो जाओगे ... "
"हां जैसे सत्तर साल का तो हूँ ही ... !" और हम दोनों हंस पड़े।
"सच कहती हूँ रे ... साला मजाक समझ रहा है ... " वो हंस के अजीब से स्वर में बोली।
"सच है ... चूत 20 साल की, बोबे 15 साल के ... जवानी 25 साल की ... गाण्ड 20 साल की ... और नशीली आंखें ... जोशीला बदन ... माल निकाल देने वाली अदायें ... 20 साल और जोड़ लो हो गया 100 का आंकड़ा।"
"हाय तुमने तो ये बोल कर मेरे बदन में आग लगा दी। आह्ह्ह्ह्ह्ह, साला लौड़ा चूत में घुस ही गया ना"
मेरा लौड़ा जाने कब कड़ा हो गया और शैली ने जोर लगा कर अपनी चूत में घुसेड़ लिया था। मुझे भी चूत का गरम गरम अहसास होने लगा। उसने अपनी चूंचियां उठा कर मेरे मुँह में घुसेड़ दी और मैं उसकी चूची एक एक करके दोनों चूसने लगा। अचानक उसके चूचियों में से दूध आने लगा। मीठा मीठा सा ... स्वाद भरा ... मैं दूध पीने लगा ... उसने अपनी चूत का धक्का जोर से मारा और मेरा पूरा लण्ड चूत ने समा लिया।
"कैसा लगा मेरे जो ... दूध का मजा ... चूत का मजा ... ?"
"इतना सारा दूध निकल रहा है ... मजा आ रहा है ... पी जाऊँ क्या ... तुम्हारा कोई बच्चा है ना ... ?"
"कुछ भी मत कहो ... तुम ही हो मेरे सब कुछ ... बस पी लो ... " और चूत उछाल उछाल कर लण्ड पर मारने लगी। उसकी छाती में से दूध भी बहने लगा। मेरा लण्ड मस्ती में भर गया थ। मेरा पेट दूध पी कर भर चुका था। जाने कितना दूध था उसकी छातियों में ...
"जो ... राजा तुम्हारा पेट भर गया क्या ...? "
"क्या ?? शैली तुम भी ना गजब की हो ... " मैंने भी अपना लण्ड ऊपर चूत पर मारते कहा।
उसका दूध निकलना बन्द हो गया था और अब वो रुक गई थी ...
"जो लण्ड निकालो तो ... मुझे सू सू आ रही है ... " मेरे लण्ड निकालते ही वो मुझसे लिपट गई और थोड़ा सा जोर लगाया तो पेशाब होने लगा। जाने कैसे मेरे लण्ड में भी तरावट आ गई और मेरे लण्ड से भी पेशाब निकल पड़ा। पेशाब निकलते ही मुझे बड़ा आराम सा लगा। हम दोनों ही पेशाब करने लगे। मुझे लगा कि साथ ही मैं झड़ भी गया हूँ ... वीर्य भी साथ निकल गया है ... एक अजीबो गरीब अहसास ... जो मुझे कभी नहीं हुआ था।
"शैली यह क्या हुआ ... मेरा तो माल ही निकल गया ... "
"मेरे दूध का असर था ... मैं भी झड़ गई हूँ ... तुमने मुझे आज पूरा सन्तुष्ट कर दिया है ... अब तुम सो जाओ।"
"आअह्ह्ह्ह्ह्ह, ये क्या ... मुझे गहरी नींद आ रही है ... ।"
"मेरे प्यारे जो, तुम्हारे पापा, मेरे मित्र थे ... अपनी मां से पूछना ... मुझे तुम्हारे नाना ने मार डाला था ... पर मैं तुमसे, तुम्हारे पापा से प्यार करती थी ... तुम्हारे अन्दर मुझे डेविड हन्टर नजर आते है ... तुमसे चुद कर यूँ लगता है जैसे डेविड ही हो ... मुझे तुम्हारा हमेशा इन्तज़ार रहेगा।" जैसे मुझे कोई दूर से बोल रहा हो ... मेरी पलकें बंद होती जा रही थी ... मैं सोना नहीं चाह रहा था। शैली मेरे ऊपर लेटी हुई मुझे चूमे जा रही थी ... । उसके प्यार की गर्मी से मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला।
सुबह पन्डित मुझे जगा रहे थे ... मेरा सर भारी था, पन्डित जी ने मुझे कॉफ़ी पिलाई ... मेरा सर थोड़ा हल्का हुआ। अचानक मुझे रात वाली घटना याद हो आई ... मैंने तुरन्त बिस्तर की ओर देखा ... वो एक दम साफ़ सुथरा था ... कोई पेशाब का दाग नहीं था।
"अब आप जाईये जो साहब ... भाभी को मेरा प्रणाम कहना ... !"
मैंने उन्हें धन्यवाद कहा।
मैं बाहर निकल आया ... मौसम साफ़ था ... मैंने कार स्टार्ट की और मडगांव की ओर चल पड़ा।
घर आ कर मैंने मां से शैली के बारे में पूछा तो उन्होने बताया कि शैली एक बहुत अच्छी लड़की थी, सुन्दर थी, पर मेरी शादी पापा से होने वाली थी। मेरे पापा को पता चला कि उनका किसी शैली नाम की बार गर्ल से प्यार था और शारीरिक सम्बन्ध भी था। तो वे भड़क उठे। एक बार पापा ने उन्हें आपत्ति जनक हालत में पकड़ लिया, शैली की तो डर मारे पेशाब निकल गई थी, उसके पेट में बच्चा भी था , पर तुम्हारे नाना बड़े बेरहम निकले और शैली की वहीं हत्या कर दी। उसे वो समुद्र में फ़ेंक आये ... तुम्हारें पापा को दादा ने बहुत मारा था ... ... ।
मां बोलती रही ... मैं वहाँ से दुखी मन से उठ कर बाहर आ गया ... और मजबूर शैली के बारे में सोचने लगा ... क्या प्यार करना गुनाह है ??? मैंने सोचा कि शैली से उस रात ही माफ़ी मांग लूंगा, पर उसकी सेक्स की इच्छा, पापा का प्यार जो उसे मुझमें नजर आता है, बच्चे को दूध पिलाने की चाह, पापा जैसा शरीर की चाह ... ये तो उसकी ही इच्छा थी ... फिर क्या कहूँ उससे ... मैं उलझता ही जा रहा था ...


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Saturday, May 29, 2010

मेरे बस के सफ़र से आगे का सफ़र-2

प्रेषक : नयन

दोस्तो, मुझे बहुत खुशी हुई कि आपको मेरी कहानी बहुत पसंद आई। बहुत सारे मेल मिले और आगे की कहानी लिखने के लिए कहा गया।
तो अब मैं आप को आगे की कहानी बताता हूँ।
बस से उतरने के बाद हम अपने अपने रास्ते निकल गए। लेकिन एक बात मेरे दिल में थी कि भले ही मैं आज कुछ नहीं कर पाया लेकिन जब भी पुनः मौका मिलेगा मैं मामी को जरूर हासिल करूँगा।
स्कूल चालू हो गया और मेरा इंतजार भी चालू हो गया कि कब दिवाली की छुटियाँ आएगी और मुझे मेरे घर जाने का मौका मिलेगा।
जैसे तैसे दिन बीत गए और मैं दिवाली की छुटियों के लिए अपने घर आ गया। आते ही मैं मामी के घर चला गया जो मेरे घर के बगल में ही था। घर पर कोई नहीं था, उनके बच्चे अपने मामा के गाँव गए थे और पति काम पर गए थे।
बहुत देर तक हम बातें करते रहे लेकिन कोई भी बात हमारे बस के कारनामे के पास भी नहीं भटक रही थी और मामी तो एकदम मासूम बनी थी जैसे कुछ भी नहीं हुआ था। और डर के मारे मैं भी कोई बात नहीं कर पा रहा था।
ऐसे ही बहुत दिन बीत गए, मैं रोज़ मामी के घर पर जाता था जब उनके पति काम पर चले जाते थे।
एक दिन मुझ से रहा नहीं गया और मैंने फैसला कर लिया कि आज कुछ भी हो, मामी से पता करवा के रहूँगा कि उसके दिल में क्या है और उसको पटा के रहूँगा। बहुत देर मैं चुप ही बैठा था और मामी अपनी धुन में कोई गाना गुनगुना रही थी।
आखिर मैंने चुप्पी तोड़ी और मामी से पूछा- मामी सच बात बताना ! क्या उस रात हम जब बस से जा रहे थे, उस वक्त आप सच में सोई थी?
" क्यों ऐसे क्यों पूछ रहे हो ?"
" नहीं, बस ऐसे ही पूछ रहा था ! बताओ ना !"
" मैं तो सोई थी, लेकिन ऐसे क्यों पूछ रहे हो ?" मैं जान गया कि मामी जानबूझ कर अंज़ान बन रही थी।
" ऐसा हो ही नहीं सकता ! क्या कोई औरत इतना कुछ होने तक कैसे सो सकती है? "
" क्या हुआ था उस रात ?"
" मामी जी, आपको सब पता है कि क्या हुआ था ! आप सब जान कर अनजान बन रही हैं !"
" नयन तुम क्या कह रहे हो, मुझे कुछ भी पता नहीं चल रहा है !"
" मामी जी उस रात जो भी मैंने किया, आपको सब पता है और आप जानबूझ कर अंज़ान बन रही हैं !"
अब मामी जान चुकी थी कि मना करने से कुछ फायदा नहीं, सो वो बोली- नयन उस रात जो भी हुआ वो सब गलती से हुआ होगा, मेरा इरादा तो कुछ भी नहीं था। तो तुम जो भी हुआ, उसे भूल जाओ, तुम अभी बहुत छोटे हो !"
" मामी जी मैं इतना भी छोटा नहीं हूँ ! आप जानती हो इस बात को ! आपने हाथ में पकड़कर देखा था !"
" और अगर आपका इरादा गलत नहीं था तो आपने मुझे तब ही रोकना था ! तब मैं इतना कुछ कर रहा था, तब तो आप बड़े मजे ले रही थी ?"
" और मुझे जब आप की जरूरत है तब मुझे याद दिला रही हो कि मैं अभी छोटा हूँ?"
" उस रात बस में जब आप मुझसे मम्मे दबवा रही थी, चूत चुसवा रही थी, उंगलियाँ डलवा रही थी और आखिर मेरा लंड हिला रही थी, और ये सब आप नींद का नाटक कर के करवा रही थी, तब मैं छोटा नहीं था ?"
" देखो नयन ऐसी बात मत करो ! मैं मानती हूँ कि मेरी गलती है ! मुझे माफ़ करो !"
" मामी बस एक बार मेरी खातिर ! वो गलती एक बार फिर करो ना !"
" मैं बहुत सपने लेकर आया हूँ ! दिन-रात बस आपका ही ख्याल था ! जाने कितनी रातो को सोया नहीं हूँ ! मुझे बस एक बार वही सब करने दो जो उस रात हुआ ! मैं आज के बाद कभी भी फिर कुछ नहीं मांगूगा !"
" नयन मैं जानती हूँ कि तुम्हारे मन की हालत कैसी होगी, लेकिन मैं शादीशुदा हूँ, मेरे बच्चे भी हैं ! अगर किसी को पता चला तो मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी !"
" मामी अगर आप मुझे एक बार के लिए हाँ नहीं करोगी तो मेरी जिंदगी बर्बाद हो जायेगी ! मैं पागल हो जाऊंगा !"
" नयन, मेरी बात को समझो ! मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ !"
" मामी, बस एक बार ! किसी को कुछ नहीं पता चलेगा ! मैं दोबारा आपसे कुछ नहीं मांगूंगा !"
"ठीक है नयन !"
मैंने मामी के पास कोई रास्ता ही नहीं छोड़ा, हाँ बोलने के सिवा ! लेकिन वो मन से तैयार नहीं थी, यह बात मैं जान गया था, लेकिन मेरे लंड में जो आग लगी थी उसे मैं ही जानता था।
तो जैसे ही मामी ने- ठीक है कहा, मैंने उनको बाहों में ले लिया।
" रुको नयन, अभी नहीं ! दोपहर में आ जाना ! अभी कोई आ जायेगा तो मुसीबत होगी !"
मैं दोपहर में उनके घर पहुँच गया। घर पर कोई नहीं था, मेरे घर के अन्दर जाते ही मामी घर के बाहर आ गई, थोड़ी देर बाहर ही रुक कर 'कोई देख तो नहीं रहा' इसका जायजा लिया और अन्दर आकर दरवाजा बंद किया।
जैसे ही दरवाजा बंद किया मैंने लपक के उनको अपनी बाहों में लिया। वो कुछ कहने ही जा रही थी कि मैंने अपने होंट उनके होंटों पर रख दिए और उनका मुँह बंद कर दिया।
" मामी अब कुछ मत कहो ! मैं जिस पल का इंतजार कर रहा था, वो अब आया है ! इस पल को जीने दो मुझे !"
अब कमरे में मेरी गहरी सांसों के सिवा कोई आवाज नहीं थी। मैं पागलों की तरह मामी को चूम रहा था और वो बस मेरा जोश देख कर हैरान होकर मुझे देख रही थी। मामी की तरफ़ से कोई पहल नहीं हो रही थी, वो तो बस पुतला बनकर खड़ी थी। लेकिन मैं जानता था कि यह ज्यादा देर नहीं चलेगा, वो भी मेरे साथ मजे लेंगी क्योंकि उस रात बस में वो भी तो गर्म हो गई थी।
तो मैं उनको चूमता ही जा रहा था और अब मेरे हाथों ने अपना काम चालू कर दिया था। मैं धीरे धीरे उनके मम्मे दबा रहा था।
क्या मम्मे थे उनके ! आज दिन के उजाले में मुझे उनके दर्शन होने वाले थे।
मैंने उनके ब्लाउज़ के हुक खोल दिए।
अब वो बड़ी-बड़ी और गोरी-गोरी चूचियाँ मेरे सामने थी जिनके लिए मैं पागल हो गया था।
मैं एक हाथ से दबा रहा था और एक को अपने मुँह में लेकर चूसे जा रहा था। मैं पूरे जोश में था क्योंकि मेरी पहली बार जो थी ! मेरे जोश ने मामी की वासना भी भड़कानी शुरु कर दी थी, उनकी सिसकारियाँ अब चालू हो गई थी और वो भी मुझे चूमने लगी थी।
मैं जोर जोर से उनकी चूची दबा रहा था और चूस रहा था। अब मेरा हाथ उनकी साड़ी खोलने लगा था और उनका हाथ मेरी ज़िप खोलने लगा था। अब मेरा लंड उनके हाथ में था और वो उसे जोर-जोर से हिलाने लगी थी।
" मामी धीरे कीजिये न ! कहीं मेरा पानी न निकल जाये !"
इस दरमियान मैंने उनकी साड़ी खोल दी थी और पैंटी निकालकर उनको पूरा नंगा कर दिया था। अब ज्यादा देर खड़े रहकर कुछ नहीं किया जा सकता था सो हम उनके बेडरूम में आ गये।
मैंने उनको बिस्तर पर बिठाया और उनके पीछे बैठकर पीछे से उनकी चूचियों को दबाने लगा और गले को चूमने लगा। अब जो नशा उन पर चढ़ रहा था वो देखने लायक था।
वो मेरे बाल पकड़ कर नोच रही थी !
मैंने धीरे से एक हाथ उनकी चूत पर रखा और सहलाने लगा। वो पागल हो रही थी। धीरे से मैंने एक उंगली चूत के अंदर डाली और हिलाने लगा और एक हाथ से चूची दबाना चालू रखा।
धीरे से उनको लिटा कर मैं उनके ऊपर आ गया था और उनकी चूची को जोर से चूसने लगा था, वो पागल हो रही थी और मुझे जोरों से भींच रही थी।
" नयन, वो करो ना ! जो उस रात को किया था !"
वो चूत चाटने के लिए कह रही थी, पर शरमा कर बोल नहीं पा रही थी।
" क्यों मामी मामा नहीं चाटते क्या ?"
" अरे वो चाटते तो क्या कहना था ! वो तो ठीक से मुझे दबाते भी नहीं ! सिर्फ़ अपना लंड चुसवाते हैं और फिर खड़ा हो गया तो अन्दर घुसा के चोदना चालू कर देते हैं !"
" कोई बात नहीं मामी ! मैं हूँ ना ! आज आपकी ऐसी चुदाई करूँगा कि आप जिंदगी भर याद रखोगी !"
मैंने जैसे ही उनकी चूत चाटना चालू किया, वो तो मचलने लगी और सिसकने लगी। शायद उनको चूत चटवाने में बहुत ही मजा आ रहा था।
" मामी क्या आप मेरा लंड मुँह में नहीं लोगी ?"
"क्यों नहीं नयन, जब उनका ले सकती हूँ तो तुम्हारा तो पूरा खा जाउंगी ! आखिर तुमने मुझे इतना सुख जो दिया है !"
मैं हैरान था, यह वही मामी है जो थोड़ी देर पहले मुझसे चुदवाना नहीं चाह रही थी।
और फिर मामी ने जो मेरा लंडा चूसना चालू किया ! मैं आपको बता नहीं पाउँगा कि कितना मजा आ रहा था !
वो पूरी लगन से मुझे खुश करने में लगी थी।
अब 69 में आकर हम दोनों पूरा मजा उठा रहे थे।
" नयन अब सहन नहीं हो रहा हैं ! जल्दी कुछ करो !"
" ठीक है मामी जी !"
मैं उनके दोनों पैरों के बीच बैठा गया और अपना लंड उनके हाथ में दिया। उन्होंने धीरे से मेरा लंड हिलाया और अपनी चूत पर रख दिया। मैं धक्का मारने ही वाला था कि उन्होंने अपनी कमर उठाई और मेरा पूरा लंड अन्दर ले लिया।
" मामी, बहुत जल्दी है क्या?"
" नयन, तुम्हें क्या बताऊँ ! तुमने तो मुझे पागल कर दिया है ! बहुत माहिर हो गए हो ! मुझे तो लगा था कि तुम अभी बच्चे हो।"
" मामी इस बच्चे को आपने ही बड़ा बना दिया है, रोज़ रात को सपने में जो आपको चोदता था !"
और मैंने अपनी गाड़ी चालू कर दी। मामी भी नीचे से कमर उठा उठा कर मजा ले रही थी।
" नयन, जोर से करो ना ! प्लीज !"
" हाँ मामी जी, आप तो बहुत जल्दी में हो ! पर मैं पूरा मजा लेना चाहता हूँ आपको तड़पाना चाहता हूँ !"
" आपने जो मुझे इतना तड़पाया है !"
मैं धीरे धीरे शॉट लगा रहा था और मामी नीचे तड़प रही थी, मुझे कस के पकड़ रही थी और पागलों की तरह चूम रही थी।
" नयन, तुम नीचे आ जाओ !"
अब मैं नीचे था और मामी मेरे ऊपर थी। वो क्या जोरों से लंड को अन्दर बाहर कर रही थी और मैं उनकी चूचियों को जोर से दबा रहा था और चूस रहा था।
" खा जाओ नयन इनको ! तुम्हारे मामा को इनकी जरुरत नहीं है शायद ! वो तो शायद मुझसे उब गए हैं !"
" कोई बात नहीं मामी ! मैं इनका ख्याल रखूँगा !"
" नयन ......... ! मैं तो गई नयन !...............हऽऽऽस्सऽऽऽऽऽ !
वो जल्दी से मेरे ऊपर से उठ गई और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं उठकर उनकी चूत को सहलाने लगा था।
नयन ! स्स्स्स ऽऽऽ !! हय ! मैं गई नयन आऽऽस्स !
और वो जोर जोर से मेरा लंड चूसने लगी थी।
" नयन आज तुमने मुझे फिर अपनी नई नई शादी की याद दिला दी है !"
" मामी आप तो खुश हो गई ! लेकिन मेरा क्या ? मैं तो अभी खाली नहीं हुआ हूँ !"
यह सुनते ही मामी ने मेरा लंड चूसना चालू किया और ऐसा कमाल दिखाया कि ......
" मामी, मेरा निकलने वाला है ! आप हट जाइये !"
" नहीं नयन ! तुम आज मेरे मुँह में ही झड़ जाओ !"
" आ ऽऽऽऽअऽऽऽ ! मामी ! मैं तो गया मामी आऽऽस्स !
मामी ने मुझे कस के पकड़ा और पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया। मामी मेरा पूरा वीर्य गटक गई थी और अभी भी मेरे लंड को चूसे जा रही थी.......
" क्यों नयन ? हो गए खाली ?"
"हाँ मामी ! आपने तो मेरा हर सपना सच कर दिया !"
" अरे यह क्या नयन ? तुम्हारे लंड में तो अब भी कड़ापन है ! यह तो सोने का नाम ही नहीं ले रहा है ?"
" क्या मालूम मामी ! लेकिन मैं एक राउंड और पूरा कर सकता हूँ !"
यह कह कर मैंने मामी को नीचे खींचा और फिर से उनके मम्मे दबाने लगा।
आगे की कहानी अगले भाग में !


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मेरे बस के सफ़र से आगे का सफ़र-3

प्रेषक : नयन
भाग-2 से आगे :
" क्यों नयन ? हो गए खाली ?"
" हाँ मामी ! आपने तो मेरा हर सपना सच कर दिया !"
" अरे यह क्या नयन ? तुम्हारे लंड में तो अब भी कड़ापन है ! यह तो सोने का नाम ही नहीं ले रहा है ?"
" क्या मालूम मामी ! लेकिन मैं एक राउंड और पूरा कर सकता हूँ !"
यह कह कर मैंने मामी को नीचे खींचा और फिर से उनके मम्मे दबाने लगा।
मेरा जोश अब पहले से भी ज्यादा था। क्या पता फिर मौका मिले ना मिले ? मैं उनके मम्मे चूसे ही जा रहा था और एक हाथ से चूत सहला रहा था। मैंने अब उनको चाटना चालू किया। उन्होंने अपने हाथों से सर के नीचे जो तकिया था, उसे कस के पकड़ा था। तो मैंने उनकी बगलों में चूमना चालू किया जिससे मामी पूरी सिहर उठी। धीरे धीरे चूमते हुए मैं नीचे आ गया और चूत चाटने लगा। अब मामी ने धीरे से अपने पैर उठाये और अपनी छाती के पास ले गई जिससे अब उनकी गांड का छेद मेरे सामने आ गया था।
" नयन, अगर तुमको तकलीफ ना हो तो थोड़ा इसे भी चाटो ना !"
मैंने अपनी जीभ गांड के छेद पर रखी और धीरे धीरे अपनी जीभ का जोर बढ़ाया। मामी कसमसा रही थी और नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मुझसे चुसवा रही थी।
" मामी क्या इस छेद को कभी किसी ने छेड़ा है ?"
" नहीं नयन, ये तो मेरी चूत को हो नहीं चाटते ! तो इसको क्या चाटेंगे !"
"मामी, मैं इसको चूसूंगा भी और बजाऊंगा भी !"
मामी अब जरा मेरा लंड गीला तो करो !"
मामी ने वापस मेरा लंड मुँह में लिया और चूसना चालू किया।
" अब मामी पेट के बल हो जाओ, मैं आपके पीछे के छेद को छेड़ता हूँ !"
" नयन, संभल के ! मैंने कभी पीछे लिया नहीं है !"
" अरे मामी जी ! तुमने कभी आगे भी नहीं लिया था ! लेकिन अब लेती हो ना !"
मैंने अपनी पकड़ बना ली और उनकी गांड पर लंड का दबाव बनाने लगा।
" नयन, धीरे से करो ! मुझे दुःख रहा है !"
" हाँ मामी ! मैं धीरे से करता हूँ !"
" मामी, एक काम करो ! आप नीचे से गांड उठाओ और धीरे से अन्दर लेने की कोशिश करो !"
लंड तो अब मेरा भी दुखने लगा था क्योंकि गांड का छेद बहुत ही छोटा था। मामी ने अपनी गांड नीचे से उठानी शुरू कर दी थी। वो गांड तो नीचे से उठा रही थी, साथ में चिल्ला भी रही थी।
" नयन, आऽऽऽऽ आआआऽऽऽ बहुत दर्द हो रहा है नयन......!"
अब लंड आधा अन्दर जा चुका था और मामी अब गांड आगे खींचने लगी थी। मुझे लगा कि मामी अब बाहर निकलेगी तो मैंने मामी को पेट के नीचे हाथ डाल कर पकड़ लिया और ऊपर से ऐसा जोर लगाया कि लंड अन्दर धंसने लगा। मामी की तो चीख ही निकलने वाली थी पर उसने जैसे तैसे रोक ली।
" मामी, अब पूरा अन्दर गया है ! अब कैसा लग रहा है ?"
" नयन, बहुत ही दर्द हो रहा है !"
" मामी, थोड़ा सहन करो ! और आपको दर्द ना हो, इस तरह से अपनी गांड नीचे से हिलाओ !"
" हाँ मामी ! बस इसी तरह से धीरे धीरे हिलाओ !"
मामी ने अपना काम चालू कर दिया था।
" मामी, कैसा लग रहा है ?"
" नयन, यह तो अलग ही अनुभव है ! मुझे बहुत ही मजा आ रहा है ! तुम भी कमर हिलाओ ना ! मजा आ रहा है बहुत !"
अब मैंने अपने शॉट धीरे से चालू किये जिससे उनको तकलीफ़ ना हो।
लेकिन मामी पूरे जोश में आ गई थी, वो तो नीचे से गांड हिला हिला कर लंड ले रही थी।
मैं भी जोरों पर था और और एक हाथ से उनकी चूची भी दबा रहा था।
बहुत देर ये खेल चला !
" मामी, क्या बस करूँ गांड की ठुकाई?"
" हाँ नयन, अब जरा मेरी चूत पर जोर लगाओ !"
मैंने गांड से लंड बाहर निकाला और उनको घोड़ी बना कर उनकी चूत में डाल दिया और पूरी गति से कमर हिलाने लगा।
मामी की सिसकारियाँ रुक रुक कर निकल रही थी जो के मेरे धक्के के कारण हो रहा था।
" मामी, कैसा लग रहा है?"
" नयन, मत पूछो ! तुम अपना काम चालू रखो !"
" नयन ! आआऽऽऽ आआआआअ....... क्या मजा आ रहा है ! मैं तो पागल थी जो तुम्हें चोदने को मना कर रही थी !"
" नयन, मैं निकलने वाली हूँ मुझे कस लो नयन ! आआऽऽऽ आआआआअ....... ! "
मैंने मामी की हालत जान ली और पीछे से उनको कस कर पकड़ लिया।
मामी ने अपनी चूत को मेरे लंड पर कस लिया जिस कारण मैं भी मचलने लगा।
" मामी, ऐसे ही चूत से दबाओ मेरे लंड को ! मैं भी निकलने वाला हूँ............मामी ऽऽऽ ! "
और मैं और मामी एक साथ झड़ने लगे। मेरे लंड का फव्वारा मामी की चूत में खाली हो रहा था और मामी भी अपनी चूत के होंट दबा दबा कर मेरा पूरा लंड खाली करवा रही थी।
" क्यों नयन, मजा आया ?"
" बहुत मामी .................बहुत मजा आया !"
"अरे अभी कहाँ ? मजा तो अब तुझे दूंगी जो तुम जिन्दगी भर नहीं भूलोगे !"
और मामी ने मेरा मुरझाया हुआ लंड अपने मुँह में लिया और अपनी जबान से और दातों से उसे चूसने लगी। मेरी हालत तो ख़राब हो रही थी, एक तो पहले ही मैं दो बार झड़ चुका था।
" मामी बस करो ना ! अब मेरे लंड में दर्द हो रहा है !"
" नयन, यह दर्द बस थोड़ी देर सहन करो ! फिर देखो !"
थोड़ी देर बाद मेरी लंड में जान आने लगी और वो वापिस पहले की तरह तैयार हो गया। मामी मेरे लंड को निहार निहार कर चाट रही थी। शायद उनको लंड चूसना बहुत ही पसंद था।
" नयन, तुम्हरे लंड में तो बड़ा जोर हैं ! यह तो तीसरी बार भी तैयार हो गया है?"
" यह तो आप के मुँह में लेने की कला के वजह से हो रहा है !"
" अब मेरी समझ में आया कि मेरी गांड में इतना दर्द क्यों हुआ ! यह तो कितना बड़ा है !"
" अब आपको पता चला ? जब चूत और गांड दोनों चोद कर हो गया ?"
" अरे तुमने देखने ही कहाँ दिया? जब देखो मशीन चालू थी तुम्हारी !"
" हाँ मामी ! अब क्या करना है मुझे ?"
" नयन, चूत और गांड तो तुमने चोद दी ! अब मैं तुम्हें मुँह चोदना सिखाती हूँ।
मामी ने मुझे घोड़ा बना दिया और मेरे नीचे आ कर नीचे से मेरे लंड को पकड़ा।
" नयन, जैसे तुमने मेरी चूत चोदी और मेरी गांड चोदी, उसी तरह अब मेरे मुँह को चूत समझ कर जोर से चोदो !"
मैंने जैसे ही अपनी कमर हिलाना चालू किया, मामी ने अपने मुँह से कमाल दिखाना चालू किया, नए-नए तरीके से मेरे लंड को मुँह में चूस रही थी, कभी अपने होंटों का दबाव बना कर, कभी अपनी जबान से सहला कर मुझे पागल कर रही थी।
मैं भी अब पूरी गति से उनके मुँह में लंड को हिला रहा था। मैं अब घुटनों के बल बैठ गया और मामी वैसे ही नीचे से सर हिला के अपने मुँह को खुद चुदवा रही थी।
मैंने एक हाथ पीछे किया और उनकी चूत में उंगली डाल दी। मामी अब आगे से सर हिला के मुँह को चुदवा रही थी और कमर हिला एक चूत में उंगली ले रही थी। अब मेरा बदन अकड़ने लगा था। मामी अपने मुँह का कमाल दिखा रही थी। मैं अब अपने हाथों पर आ गया और कमर हिला हिला के मामी का मुँह चोदने लगा।
मामी पूरा लो ! खा जाओ ! मैं तो झड़ने वाला हूँ ऽऽ !!
और एक जोरदार धक्का लगाकर मैं उनके मुँह में झड़ गया। पहले की तरह मामी ने मेरा वीर्य पूरा चाट लिया और मेरे लंड को साफ कर दिया।
फिर हमने उठ कर कपड़े पहन लिए।
" मामी, मैं निकलता हूँ ! आपने आज मेरा सपना पूरा कर दिया ! अब मैं आप से दोबारा कुछ नहीं मांगूंगा !"
" नयन भले ही तुम मुझे दोबारा कुछ नहीं मांगो, लेकिन तुमने आज जो ख़ुशी मुझे दी है, अब मैं तुमसे रोज तुम्हारा लंड मांगूंगी ! तो फिर नयन कल दोपहर को आओगे ना? मैं तुम्हारा इंतजार करुँगी।"
तो दोस्तो ! कैसी लगी मेरी आगे की कहानी ?
अब तो मैं इतना चोदने का आदि हो गया हूँ कि जब तक दो बार झड़ता नहीं, मैं नीचे उतरता ही नहीं।
तो अब मैं 29 साल का हूँ और मुंबई में रहता हूँ।


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मेरी सहकर्मी पल्लवी

प्रेषक : सुपर हीरो
मेरा नाम राज है, मैं एक 26 साल का लड़का हूँ, पेशे से इंजिनियर हूँ, एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी के ऑफिस में काम करता हूँ। वैसे तो मेरे साथ बहुत सी लड़कियाँ काम करती है पर एक लड़की पर मेरा दिल आ गया था। कुछ ही महीनो पहले एक नई लड़की ने हमारी कंपनी ज्वाइन की थी जिसका नाम पल्लवी है। वो देखने में बहुत खूबसूरत है, उसके मम्मे उतने बड़े नहीं, पर वो देखने में बहुत गौरी है, उसकी आवाज भी बहुत मीठी है। वो अगर सामने आ जाये तो नजर नहीं हटती। वो कभी सलवार पहन कर आती तो कभी जींस।
मैं देखने में उतना खूबसूरत तो नहीं हूँ पर प्यार किया तो डरना क्या !
एक दिन मैं ऑफिस जल्दी पहुँच गया था, उस वक़्त कोई भी वहाँ नहीं था। थोड़ी देर में वो भी आ गई, उस वक़्त ऑफिस में सिर्फ हम दोनों थे। मैं भी अपने काम में लगा हुआ था, तभी एक मीठी सी आवाज से उस लड़की ने मुझे पीछे से पुकारा। उसने अपना हाथ हैन्डशेक करने के लिए बढ़ाया और अपना परिचय दिया। मेरे तो मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी, मैं उसकी तरफ एक टक देखे जा रहा था। वो भी मुझे इस तरह देखते झेंप गई और मेरा ध्यान भंग करते हुए मुझसे अपना परिचय देने को कहा।
मैंने झट से अपना परिचय दे दिया। बस फिर क्या था, मैं भी उससे बात करने के लिए उसके बारे में पूछने लगा- वो पहले कहाँ काम करती थी ? उसके दोस्त कैसे थे वगैरह-वगैरह !
बातों ही बातों में मैंने उसे कॉफ़ी के लिए पूछ लिया। वो भी जल्दी से तैयार हो गई। फिर हम दोनों ने कैंटीन में जा कर काफ़ी पीते पीते बहुत सी बातें की।
यह सिलसिला काफी दिनों तक चला। एक दिन हम लोगों ने बाहर जा कर खाना खाने की सोची। वो एक बार बोलते ही तैयार हो गई थी। मैं उसे एक मंहगे होटल में ले गया था, वो होटल मेरे घर के काफी नजदीक था। हमने खाना आर्डर किया और खाना का इन्तजार करने लगे। खाना आने में बहुत समय लग रहा था तो मैंने उसको समय बिताने के लिए कोई चुटकला सुनाने को बोला। वो थोड़े नखरे करने के बाद एक चुटकला सुनाने को तैयार हो गई। उसने एक बकवास सा बच्चों वाला चुटकला सुना दिया। उसे खुश करने के लिए मैं बहुत हँसा।
अब मेरी बारी थी, मैंने उसे एक दोहरे मतलब वाला व्यस्क चुटकला सुना दिया, जिसे सुन कर वो शरमा गई और मुस्कुराने लगी। मैंने मौका देख कर एक और वैसा ही चुटकला सुना दिया। इस बार उसने मुझे 'शरारती' कहते हुए मेरे हाथ पर हल्के से चपत लगा दी। हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा रहे थे। इतनी देर में खाना भी आ गया था। हम खाना खाते खाते अपनी रुचियों के बारे में बात करने लगे।
बातों बातों में हम एक दूसरे का हाथ छू लिया करते थे, वो बिलकुल भी ऐतराज नहीं करती थी। मेरा भी साहस बढ़ रहा था।
एक दिन हम नई मूवी के बारे में बात कर रहे थे, उसने मुझसे कोई एक मूवी लाने को कहा। अगले दिन मैंने उसे मूवी के साथ एक और इंग्लिश मूवी भी दी जिसमे कुछ सीन भी थे। दूसरे दिन जब उसने मुझे मेरी सीडी वापस की तो कहा कि वो इंग्लिश वाली मूवी उसे बहुत अच्छी लगी। मैं भी समझ गया कि यह तो खुल्लम खुल्ला लाइन दे रही है। मैंने मौका का फायदा उठाते हुए उससे शॉपिंग में मेरी मदद करने को कहा। वो झट से मान गई।
अगले दिन हम जब शॉपिंग के लिए गए तब मैं अक्सर साथ चलते चलते उससे टकरा जाता, ट्रैफिक क्रॉस करते हुए उसका हाथ पकड़ लेता। वो ऐतराज नहीं करती थी।
मैं जानबूझ कर उसकी चूचियों से टकरा जाता, वो भी मेरे काफी नजदीक आ गई थी, वो अक्सर मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे दुकानों में खींच लेती थी। मुझे भी बहुत मजा आता था और एक अजीब से सनसनी पूरे शरीर में दौड़ पड़ती। देखते देखते मेरी भी झिझक कम हो गई थी, मैंने भी उसके गले में हाथ डालना शुरू कर दिया था, फिर मैं अक्सर उसके बालों को सहलाने लगता, उसके गालों को आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगलियों से छू लेता था।
पल्लवी अब मुझ से काफी घुल मिल गई थी। एक बार हम दोनों पिज्जा खा रहे थे, और थोड़ा सा सॉस उसके नाक पर लग गया, मैंने अपनी ऊँगली से उसकी नाक पर से सॉस को पौंछ दिया, उसने भी झट से मेरा हाथ पकड़ कर मेरी ऊँगली से सॉस को चूस कर साफ़ कर दिया। उसे ऊँगली चुसवाने से मुझे जो मजा आया वो मैं बयान नहीं कर सकता। मेरा रोम रोम खड़ा हो गया था, लौड़े से तो मानो एक बार पिचकारी छूट ही गई थी।
मैं इतना ज्यादा रोमांचित हो गया कि मैंने अपनी आँखें बंद कर ली थी। मैंने तुंरत उसी ऊँगली को सॉस में डूबा कर कहा- एक बार और करो ना !
यह सुन कर वो शरमा गई और दोबारा मेरी उंगलियों को चूसना शुरू कर दिया। इस बार उसने पूरे 15 सेकंड तक मेरी ऊँगली को चूसा होगा। बस फिर क्या था, मुझे तो ग्रीन सिग्नल मिल गया था, मैंने भी खाना आधा छोड़ कर पेमेंट किया और उसके साथ जल्दी से होटल के बाहर आ गया।
हमने एक ऑटो किया और उसे समुन्दर के किनारे ले जाने को कहा। समुन्दर काफी दूर था, अब बस मैं और वो ऑटो की पीछे की सीट में बैठे बैठे पागलों की तरह एक दूसरे को चूमने लगे, मैं उसको पूरी ताकत से अपनी बाहों में कसने लगा और उसके गले के पीछे और उसके होठों को चूमने लगा।
एक लड़की को किस करने का आनंद मैं लिख कर बयान नहीं कर सकता। मेरे लौड़ा पूरी तरह खड़ा हो गया था, वो भी पूरी तरह गर्म हो गई थी।
मैंने ऑटो वाले को ऑटो अपने घर के तरफ मोड़ने को कहा।
घर में घुसते ही हम दोनों पागलों के जैसे एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। हम कोई भी बात नहीं कर रहे थे, बस एक दूसरे को चूम-चाट रहे थे। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ पकड़ कर दबाने शुरू कर दिए, वो मुझे और जोर से किस करने लगी थी।
फिर उसने मुझे कहा- अब बस और देर मत करो और जल्दी से बिस्तर पर चलो !
हम दोनों पूरी तरह नंगे हो गए थे और दोनों की सांसें काफी जोर जोर से चल रही थी।
वो जाकर बेड पर लेट गई, उसकी चूत पर बहुत से रेशमी बाल थे जिसमें से उसकी चूत दिख नहीं रही थी। में भी उसके ऊपर लेट गया और अपने लौड़े को उसकी चूत पर रख दिया। उसने मुझे तुंरत रोक दिया और कहा- कंडोम है या नहीं ?
मैंने तुंरत दराज से एक कंडोम निकला और पहन लिया। इतनी देर में मेरा लौड़ा थोड़ा मुरझा गया था, वो भी समझ रही थी। मुझे उसे बोलना अच्छा नहीं लग रहा था कि मेरा लौड़ा चूसे। सो मैंने उसकी चूत में ऊँगली करनी शुरू कर दी और दूसरे हाथ से उसके मम्मे दबाने लगा और अपने मुँह से दूसरे मम्मे को चूसने लगा।वो अजीब अजीब सी आवाजें निकालने लगी, जैसे उसे बहुत मजा आ रहा था। थोड़ी ही देर में वो झड़ने लगी। झड़ने के बाद मैंने उसे अपना लौड़ा दिखाते हुए कहा- तुम मेरे लौड़े को चूसो ना !
वो थोड़े नखरे करने के बाद मान गई। उसने जैसे ही मेरा लण्ड मुँह में लिया, मुझे अलौकिक आननद की अनुभूति होने लगी। थोड़ी देर में जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, मैंने उसके मुँह से लौड़े को निकाल लिया और उसकी चूत पर रख दिया और जोर जोर से धकेलने लगा। मेरा लौड़ा पूरी तरह उसकी चूत के अन्दर घुस गया था, मैंने आनंद में अपनी आँखें बंद कर ली, धीरे धीरे चोदना शुरू कर दिया। कुछ ही पलों में हम दोनों फिर से झड़ने लगे।
मैं काफी देर तक उसके साथ लेटा रहा, थोड़ी देर में हम दोनों तैयार हो कर चल पड़े।
हम अब अक्सर मिला करते थे। धीरे धीरे मैंने उसे गांड मरवाने के लिए भी राजी कर लिया था।
मेरी कहानी अगर आपको पसंद आई तो जरूर कमेन्ट करना... मैं आगे भी ऐसे ही कहानी लिखता रहूँगा।


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बस के सफ़र में पहला सेक्स सफ़र

प्रेषक : नयन देशमुख
नमस्ते दोस्तो ! मेरा नाम नयन है, अब मेरी उम्र ३१ साल है पर बात तब की है जब मैं अट्ठारह साल का था। मैं दसवी में पढ़ रहा था।
मेरे बाजू वाले घर में वीणा रहती थी। हमारा उनके यहाँ आना जाना तो था, थोड़ी मस्ती भी करता था पर गलत इरादे न उसके थे न मेरे थे।
मुझे मेरे मामा के घर जाना था। गाँव का नाम बताना यहाँ ठीक नहीं होगा लेकिन रात भर का सफ़र था, वीणा को भी गाँव जाना था, उनके बच्चे छुट्टियों में गाँव गए थे उनको वापस मुंबई लाना था। उनका गाँव मेर मामा से गांव से नजदीक था तो वो भी मेरे साथ आने को निकल पड़ी। अब उनको भी अकेले जाने से अच्छा था कि मेरे साथ जाये !
बस में भरी भीड़ थी छुट्टियाँ जो थी। हमें मुश्किल से पीछे वाली दो सीट मिली, सामान रखने की भी जगह नहीं थी। तो वीणा ने अपनी सूटकेस अपने पाँव के नीचे रख लिया। मैं खिड़की के साथ में बैठा था। बस निकल पड़ी अपने मुकाम की तरफ।
रात के १० बजे होंगे जब हम निकले। टिकट कटवाने के बाद बस की लाइट बंद हो गई और कब नींद आई पता ही नहीं चला।
नींद में ही मेरे हाथ साथ में बैठी वीणा को लगा और मेरी नींद खुल गई। वीणा की साड़ी कमर तक ऊपर आ गई थी। मैंने ध्यान से देखा तो पता चला कि सूटकेस रखने की जगह नहीं होने के कारण उन्होंने जो सूटकेस अपने पैरो के नीचे रखा था उस वजह से उनके पैर ऊपर हो गए थे और साड़ी फिसल के कमर तक आ गई थी। अब मेरी हालत देखने लायक थी। क्या करूँ समझ में नहीं आ रहा था।
तो मैंने भी नींद में होने का नाटक किया और धीरे धीरे मैं उनको हाथ लगाने की कोशिश करने लगा। डर तो बहुत लग रहा था कि कहीं उनकी नींद न खुल जाए। लेकिन जो आग मेरे अन्दर भड़कने लगी थी वो मुझे शांत कहाँ बैठने दे रही थी, तो मैंने भी नींद का नाटक कर के अपना हाथ चलाना चालू रखा। अब मेरा हाथ धीरे धीरे उनकी पैन्टी को छूने लगा था। मेरी नजर हमेशा यही देख रही थी कि कहीं वो नींद से न जग जाय।
बस में काफी अँधेरा था और मैं एक नई रोशनी ढूंढ रहा था। मेरा हाथ अब उनकी जांघों पे फिसल रहा था। इतने में उन्होंने अपना सर मेरे कंधे पे रख दिया। मेरी तो डर के मारे जान ही निकल गई। मुझे लगा कि वो जग गई लेकिन वो तो गहरी नींद में थी। अब मैं थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा।
लेकिन इस चक्कर में हम दोनों में जो दूरी थी वो और कम हो गई और इसको मैंने ऊपर वाले की मेहरबानी समझा। अब मेरी हिम्मत बढ़ने लगी थी और मेरा हाथ अब थोड़ी और सफाई से चलने लगा था लेकिन फिर भी सम्भाल के जांघों पे हाथ फेरने के बाद अब मैंने धीरे से उनकी पैन्टी में हाथ घुसाया। बाल तो एकदम साफ किये हुए थे। अब मैं उनकी चूत को धीरे धीरे सहलाने लगा लेकिन एकदम संभल के।
थोड़ी ही देर में उनके बदन से अजीब सी खुशबू आने लगी थी और मेरी उंगली गीली हो गई थी, उनकी चूत अब पानी छोड़ने लगी थी। अब मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि वो सच में सोई है या उनकी नींद खुल गई है। लेकिन एक बात तो ध्यान में आ गई थी कि कोई भी औरत इतना सब करने के बाद भी सो नहीं सकती। अब मेरी हिम्मत तो बढ़ गई थी लेकिन मन में डर अब भी था .कही ओ सच में सोई हुई तो नहीं .लेकिन अब रुकना मेरे बस में नहीं था सो मिने भी सोचा जब उठ जायेगी तब देख लेंगे .वासना पे किसी का जोर नहीं चलता.
मैंने हिम्मत की और एक हाथ से उनकी चुत में उंगली करना चालू रखा,और दूसरा हाथ उनकी चूची की तरफ बढाया और धीरे से उन्हें मसलना चालू किया .मेरी जिंदगी का ये पहला अनुभव था और इतनी आसानी से मौका मिलेगा ये मैंने सोचा भी नहीं था .उनकी हलचल तो बढ़ गई थी लेकिन ओ आँखे खोलने को तैयार नहीं थी .शायद अब उनको पानी निकल ने को था .तो मैंने भी मेरी उंगली की रफ्तार बढाई.और उन्होंने मेरी उंगली को अपनी चुत की फाको से दबा क रखा .शायद ओ शांत हो गई थी .लेकिन मेरा तो लंड एकदम ताना हुवा था .क्या करू समाज में नहीं आ रहा था .मैंने उनका हाथ उठाया और मेरी चैन खोल के लंड को बहार निकला और उनके हाथ में दे दिया .लेकिन ओ कुछ भी करने को तैयार नहीं थी .तो मैंने फिर से उनकी चूची को दबाना चालू किया.चुत में उंगली भी डालना चालू रखा .पर कुछ फायदा नहीं हुआ।
पूरी रात निकल गई जाने कितने बार ओ झड़ गई थी पर मेरे लंड से पानी नहीं निकला था .अब मेरे लंड में दर्द शुरू हो गया था .तो मैंने अपने हाथ से ही धीरे धीरे लंड हिलाना चालू किया ३-४ बार ही हिलाया था के मेरा भी पानी निकल गया.फिर नींद कब लग गई पता ही नहीं चला .सुबह ८ बजे गाड़ी हमारे गाव में पहुच गई .वीणा ने मुझे उठाया और हम बस से उतर गए ,यहाँ से हमारे रस्ते अलग होने थे.मुझे बड़ा दुःख हो रहा था .के जिंदगी का पहला सेक्स अनुभव और ओ भी अधुरा ही रह गया .मैं देख रहा था क उनके चहरे पे कोई भावः नहीं था .मैंने रत को उन के साथ कुछ किया हो ऐसा कुछ भी नहीं जाता रही थी. जैसे कुछ हुवा ही नहीं .................मैं उदास था. के अब मुझे अपने मामा के यहाँ जाना था और ओ अपने बच्चो को ले के वापस मुंबई जायेगी।
लेकिन एक बात तय थी ओ सोई नहीं थी सोने का नाटक कर रही थी.और मुझे इस बात की ख़ुशी थी के आज भले ही मैं कुछ नहीं कर सका लेकिन मैं जब वापस मुंबई जाऊंगा तो शायद मेरा कम बन जाये .....और मैं जिंदगी का पहला सेक्स वीणा के साथ ही करूँगा।
आगे की कहानी दुसरे किसी दिन बताऊंगा अगर आप को मेरी आगे की कहानी जाननी है तो मुझे लिखे क आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी

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Thursday, May 27, 2010

बिना सिंदूर का सुहाग-2

प्रेषिका : अर्चना शर्मा
फिर 6 दिन बाद मैं कॉलेज गई तो वो गेट के बाहर मेरा इंतज़ार कर रहा था ...
मैं बिना कुछ बोले उसकी बाईक पर बैठ गई... वो सीधे अपने घर ले गया और पूछा- आज भी करवओगी या नहीं ...?
मैं बोली- आज पूरी तरह तैयार हूँ ... तुम कंडोम ले आये? वो बोला- हाँ ले आया ...
फिर हम घर के अन्दर घुसे और उसने गेट बंद कर दिया...
वो जाते ही पहले मुझे किस करने लगा... हमने पहले किस किया फिर उसने मेरे बूब्स दबाये ... फिर उसने बहुत देर नहीं की और मुझे पूरा नंगा कर दिया ...अब मैं सिर्फ पैंटी में थी ... उसने काफी देर तक मेरे बूब्स को मसला...मुझे मजा आने लगा… फिर उसने मेरी पैंटी उतार दी और मेरी चूत को चाटने लगा ...
शायद उसे मुझे चोदने की बहुत जल्दी थी इसलिए उसने अपने कपड़े उतार दिए और कहा- जानू, क्या अब मैं तुम्हारी चूत में अपना लंड डालूँ...?
मैं बोली- डालो ...
फिर उसने मुझे बेड पर लेटाया और मेरी चूत के सामने अपना जिमी( लंड) रखा और एक बार में आधा जिमी मेरी चूत में घुसा दिया... एक साथ घुसने से मैं तो मर ही गई और चिल्लाने लगी- जान, निकालो अपना जिमी ! मैं तो मर गई। वो बोला- कुछ देर की बात है, फिर तो बहुत मजे आने वाले हैं...
मैं बोली- नहीं, मुझे तो बहुत दर्द हो रहा है, खून भी निकल रहा है, यार तुम निकाल दो ...
लेकिन वो निकालने कहाँ वाला था अब वो तीसरा मौका नहीं गंवाने वला था ... उसने तो मुझे मारने की कसम खा रखी हो, ऐसे कर रहा था ! मैं चिल्ला रही थी लेकिन उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ा, वो अपना पूरा पाँच इंच लम्बा मेरी चूत में डाल कर रगड़ने लगा...
मेरे मुँह से आवाजें आने लगी- आह्ह्ह ओह्ह्ह मर गय्य्ई आह्ह .......
थोड़ी देर बाद मुझे भी मजा आने लगा.... मैं बोली- जानू, तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी..
फिर करीब दस मिनट बाद मेरा पानी आ गया तो मैं बोली- अब बस करो ..
वो नहीं रुका जब तक कि उसका पानी नहीं निकल गया ...
पाँच मिनट बाद उसका भी पानी छुट गया ..
अब वो भी शांत होकर मेरे पास लेट गया ...
फिर थोड़ी देर बाद अपनी भाभी के कमरे में ले जाकर बोला- यह लो, भाभी की साड़ी पहन लो ... मुझे साड़ी पहन कर करने में मजा आता है।
मैंने मना कर दिया तो बोला- चलो, साड़ी नहीं पहनी आती तो सूट पहन लो ... यह रही भाभी की ड्रेसिंग ! इससे तैयार हो जाना ...
और गेट बंद करके चला गया ..
मुझे तो बहुत गुस्सा आ रहा था ... मैं सोच रही थी कि मुझे जींस में ही क्यों नहीं चोद देता है ... एक बार तो चोद चुका है, फिर क्या दिक्कत है .... मुझे पहले तैयार होने को कहता है ... मैं तैयार नहीं हुई ....
करीब दस मिनट बाद तरुण वापिस आया और बोला- तुम अभी तक तैयार नहीं हुई ?....कब होगी? मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है... ऐसा बोलते हुए...वो जबरदस्ती मुझे सूट पहनने लगा ..और कहा- अभी मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है ....
फिर मुझे लगा क्यों ना उसके सामने साड़ी पहन कर जाऊँ ...जिससे वो खुश हो जाये ! फिर मैंने भाभी की साड़ी ली और उसे पहन कर तैयार होने लगी...
फिर मैं ख़ुशी ख़ुशी तैयार होने लगी ...
उसे पहनने में करीब बीस मिनट लग गए, तरुण फिर आया, मैं बोली- अभी टाइम लगेगा...
मैं बोली- जानू, मैं ऐसा तैयार होकर आउंगी... तो तुम देखते ही रह जाओगे !
फिर मैं ...लिपस्टिक ...काजल ..चूड़ा वो सब जो दुल्हन पहनती है, वो मैंने पहना .... मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था...
मैंने अपने आप को देखा तो बिलकुल दुल्हन लग रही थी...
फिर जब मैं पूरी तरह तैयार हो गई तो दरवाज़ा खोल कर बाहर आई तो तरुण भी शेरवानी पहन कर तैयार था।
मैं शर्माते हुए बोली- आप बहुत सुन्दर लग रहे हैं...
वो बोला- जान, तुम तो सूट पहन कर आने वाली थी फिर साड़ी ...? इसमें तो तुम बिलकुल अप्सरा लगा रही हो... मेरा दिल खुश कर दिया तुमने !
फिर हम लोग एक दूसरे को चूमते हुए बिस्तर पर आ गए...
उसने कहा- जान, घूँघट तो करो ! फिर मैं उसे उठाऊंगा !
मैंने ऐसा ही किया और अपने सर पर घूँघट रख लिया...
वो एकदम से पीछे हटा और फिर मेरे पास आता हुआ बोला- आज हमारी सुहागरात है ! जिसे हम बहुत यादगार बना देंगे ...
मैं बोली- पहले आप शुरू तो करो साजन, फिर ही तो इसे यादगार बनायेंगे ....
वो बोला- इतनी भी क्या जल्दी ? अभी तो बहुत समय पड़ा है, आराम से करेंगे ...
मैं बोली- जैसे सजन बोले वैसा ही होगा....
फिर वो मेरे करीब आया और मेरा घूँघट उठाने लगा....
उठाते ही बोला- क्या तो सुन्दर अप्सरा लग रही हो !
मैं कुछ नहीं बोली ...
फिर उसने मेरे स्तन दबाना शुरू कर दिए... मुझे इस तरह दबाने में बहुत मजे आ रहे थे...
मैंने भी आहें भरना शुरू कर दिया- ओह्ह आह्ह ....
फिर उसने मुझे एक लम्बा किस दिया .... मैंने भी उसका साथ दिया....
थोड़ी देर बाद उसने मेरा ब्लाउज उतारा और मेरी ब्रा में से ही स्तन दबाता रहा ..
फिर उसने मेरी ब्रा को उतारा और मेरे स्तनों को आजाद कर दिया ....
अब मेरे खड़े निप्पल साफ दिखई दे रहे थे ...जिसे तरुण ने मुँह में लेकर आनंददायक बना दिया...
उसे मेरे बूब्स बहुत पसंद आये और उसने उन्हें काफी देर तक मसला ...जिससे मैं गर्म हो गई .... मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि मेरी चूत का पानी बाहर आने को आतुर हो चुका था ... मैंने तरुण से कहा- जान, मेरा पानी आने वाला है !
तो उसने पेटीकोट के अंदर मुँह डाल कर मेरी पैंटी में से ही मेरा पानी चूसना शुरू कर दिया... इससे मुझे काफी अच्छा लग रहा था...
फिर थोड़ी देर बाद वो पेटीकोट से निकला और मेरे साड़ी उतारने लगा ...अब मैं सिर्फ पैंटी में थी।
जब वो मेरी पैंटी उतारने वाला था तो मैंने कहा- अब मैं तुम्हें नंगा करुंगी ...
फिर मैंने उसकी शेरवानी उतार फेंकी ! उसने अंदर कुछ नहीं पहना था ...मैं उसे चूमने लगी.. मैंने उसके सीने पर बहुत देर तक किस किये...
फिर मैंने उसका पायजामा उतार दिया ...अब वो अंडरवियर में था, वो बोला- मेरा जिमी मुँह में लोगी ?
मैंने मना कर दिया...
फिर मैंने उसकी अंडरवियर को एक बार में खींच कर निकाल दिया और उसके जिमी के साथ खेलने लगी... जब मैं जिमी के साथ खेल रही थी तो उसने भी मेरी पैंटी उतार दी और मेरी चूत से खेलने लगा... मुझे उसकी इस हरकत से काफी मजा आया और मैंने उसे एक किस कर दिया....
अब मुझे चूत चुदवाने की इच्छा हो रही थी, मैंने तरुण को कहा- जान, अब रहा नहीं जाता ! प्लीज अब मेरी चूत में वापिस अपना जिमी डाल दो....
तरुण बोला- जैसी आपकी इच्छा ...
फिर उसने मुझे एक लम्बा किस दिया और बेड पर लिटा दिया और मेरी चूत के पास अपना लंड ले आया और चूत में लंड को घुसाने लगा...
अब वो आराम से घुसा रहा था ....अब मुझे थोड़ा दर्द हुआ जिसे मैंने सहन कर लिया ...
फिर मुझे भी मजा आने लगा तो मैंने कहा- जान, अब स्पीड तेज़ कर दो ...
तो वो बोला- अभी करता हूँ जान ...
फिर मुझे एक किस किया और उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी...
थोड़ी देर बाद उठा और बोला- अब तुम घोडी बन जाओ !
मैंने मना किया तो बोला- एक बार करके तो देखो ...
फिर मैं घोड़ी बनी...
उसने मुझे घोड़ी में चुदाई की जिसमें मुझे बहुत मजा आया ...
थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गए...
फिर मैंने बोला- यार, अब बाथरूम में चल कर नहाते हैं...
उसे मेरा विचार पसंद आया और वो मेरे लिए एक गाऊन ले आया और खुद अंडरवियर में ही आ गया। फिर हमने बाथरूम का फव्वारा चालू किया और हम दोनों एक दूसरे को चूमते हुए नहाने लगे...
कभी वो मेरे बूब्स दबा देता, कभी मैं उसका जिमी दबा देती...
इस तरह हम लोग मजे करने लगे...
वो बोला- जान, तुमने मांग नहीं भरी ?
मैं बोली- नही !
तो बोला- सिंदूर लाओ ! मैं भर देता हूँ ...
मैं बोली- ऐसे ही ठीक है ....
वो बोला- बिना सिंदूर का सुहाग?
फिर उसने मेरा गाऊन उतारा और मेरी चूत में हाथ डाल कर मस्ती करने लगा ... मुझे इस से बहुत मजा आ रहा था...
फिर उसने अपनी अंडरवियर उतारी और मेरी चूत में डाल कर मुझे दोनों हाथों से उठा कर चूमते हुए चोदने लगा ....
कुछ देर बाद हम दोनों झड़ गए ...
इस तरह हमने कई बार चुदाई की और बहुत मजा आया.....


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Wednesday, May 26, 2010

बिना सिंदूर का सुहाग-1

प्रेषिका : अर्चना शर्मा
दोस्तो, मैं आपकी अर्चना लेकर आई हूँ अपनी कहानी !
मैं २३ साल की युवती हूँ, कॉलेज में बी ए फ़ाइनल इयर की छात्रा हूँ।
एक बार की बात है मैं गौरव टावर पर शौपिंग करने गई थी, वहाँ मुझे एक लड़का बार बार घूर रहा था। जब मैं वहाँ से निकली तो वो लड़का भी मेरा पीछा करने लगा।
मैं कॉलेज जा रही थी, वो भी मेरे पीछे पीछे आने लगा। मुझे डर लगने लगा। जैसे ही मैं बस से उतरी तो वो एक दम मेरे पीछे आकर बोला- हेल्लो, मैं तरुण ...
लेकिन मैंने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और चलती रही। मेरी सांसें और धड़कन बढ़ रही थी...
एक दम से मेरे सामने आकर बोला- मैं तरुण हूँ और आप से दोस्ती करना चाहता हूँ...
मैं बोली- अभी मैं कॉलेज के लिए लेट हो रही हूँ ... बाद में बताऊंगी...
फिर मैं क्लास में पूरा समय उसी लड़के के बारे में सोचती रही कि लड़का तो स्मार्ट है.. पर अगर किसी को पता चल गया तो...
फिर में दो पीरियड के बाद ही कॉलेज से आ गई...
अब वो कॉलेज के बाहर मोटर साइकिल पर बैठा था, मुझे ना जाने क्या हुआ... मैं सीधे उसके पास गई और उसकी बाइक पर बैठ गई और बोली- जहाँ चलना हो चलो...
वो मुझे गार्डन में ले गया और बोला- जान, आज तो कमरे का इंतजाम नहीं हो पाया है लेकिन कल कर लूंगा !
फिर वो मुझे मेरे घर तक छोड़ कर आया ...
अगले दिन मैं कॉलेज नहीं जा कर तरुण के साथ चली गई। वैसे मुझे बहुत डर लग रहा था क्योंकि मेरी सहेलियाँ कहती थी कि पहली बार चूत में लंड जाने पर बहुत दर्द होता है, मुझे सेक्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी।
वो मुझे अपने दोस्त के घर ले गया ...जहाँ पर उसका दोस्त नहीं था ...
फिर उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया .... जब वो किस कर रहा था तो मुझे काफी डर लग रहा था, मेरी सांसें फ़ूल रही थी... वो मेरे स्तन दबाते हुए बिस्तर पर ले गया ....
मैंने कहा- तरुण आज नहीं ! मुझे बहुत डर लग रहा है...
तरुण- यार तुम डरो मत ! मैं तुम्हारे साथ हूँ तो डरने वाली कोई बात नहीं है...
फिर वो मुझे किस करने लगा ...और चूचियां भी दबाने लगा ...
उसने कहा- अब मैं तुम्हारा टॉप उतारूंगा तो...
मैं बोली- आज इतना ही काफी है ...अब बाद में करेंगे ...
उसने मेरी बात नहीं सुनी और मेरे टॉप को उतार दिया .... ब्रा में से ही स्तनों को चूमते हुए बोला- बहुत मस्त हैं तेरे बूब्स तो ...
ऐसा बोलते ही उसने अब मेरी ब्रा को भी उतार फेका ... अब तो मुझे बहुत डर लगने लगा ... वो मेरे बूब्स चूस रहा था और मेरी धड़कनें बढ़ रही थी ...वो जैसे ही मेरी जींस खोलने लगा, मैं पीछे हट गई और बोली- नहीं जान, आज केवल इतना ही काफी है...
फिर वो बोला- ठीक है, हम कल वापिस यहीं पर आयेंगे ....
मैं बोली- ठीक है...
अब मेरी जान में जान आई ... फिर हम थोड़ी देर बाद उसके दोस्त के घर से निकल गए और वो मुझे घर छोड़ चला गया ...
अगले दिन फिर वो मुझे लेने आ गया ...
आज मैं सोच कर आई थी कि आज तो चूत में लंड डलवा ही लूंगी ...दर्द एक बार तो होना ही है जो आज हो जाएगा ! फिर तो मजे करेंगे...
फिर वो मुझे बेड रूम में ले गया और मुझे किस करने लगा ... आज मैं भी उसका साथ दे रही थी... अब किस करने में मुझे भी मजा आ रहा था ..
फिर वो मेरे स्तन दबाने लगा, अब मुझ में भी कामदेव आये थे इसलिए मुझे बहुत मजा आने लगा....और मेरे मुँह से आवाजें निकलने लगी- अरे तरुण ! तूने तो मार डाला ..अह्ह्ह ओह्ह ....अह्ह्ह ओह्ह....
फिर उसने मेरा टॉप उतारा और स्तन पकड़ने के लिए ब्रा के अन्दर हाथ डाल दिया और दबाने लगा ....फिर उसने एक झटके में ब्रा उतार फेंकी जिससे उसका हुक टूट गया ....
अब वो मुझे बिस्तर पर लिटा कर मेरे स्तनों से खेलने लगा ....
फिर उसने मेरी जींस उतारी और मेरे पैरों को चाटने लगा ...मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी ... मैंने कहा- अब तुम अपने कपड़े खोलो तो ...
तरुण बोला- जान तुम ही खोल दो ना ...
फिर मैंने उसकी जींस खोलनी चाही तो बोला- जान पहले टी-शर्ट खोलो ..
मैं बोली- ठीक है !
और मैंने उसका टी-शर्ट उतार फेंका ... उसने बनियान नहीं पहना था ..मैं उसके बदन को चूमने लगी। वो आंखें बंद करके मजा लेने लगा...
फिर मैंने उसकी जींस उतार फेंकी ...
वो बोला- लंड मुँह में लोगी?
मैं बोली- मुझे पसंद नहीं है...
फिर उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी पैंटी उतार कर चूत पर किस करने लगा ... मुझे बहुत अच्छा लग रहा था ...
फिर उसने कहा- जान अब क्या मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में डालूँ ... ?
मैं बोली- डाल दो ! लेकिन दर्द हुआ तो मैं करने नहीं दूंगी..
फिर उसने अपना थोड़ा सा लंड डाला, मुझे दर्द होने लगा, मैंने कहा- मुझे दर्द हो रहा है ! रहने दो !
लेकिन वो नहीं माना और थोड़ा और डाल दिया ...
मुझे दर्द तेज़ होने लगा तो मैं उठ कर दूर चली गई ...मैं बोली- जानू, आज नहीं, फिर कभी करेंगे ... अबकी बार तुम कंडोम भी लेकर आना ! मुझे बहुत डर लगता है बिना कंडोम के....
वो बोला- ठीक है ...
मैं बोली- ठीक है लेकिन अब 3-4 दिन बाद मिलेंगे ..
और हम दोनों अपने अपने घर चले गए !
आगे क्या हुआ, कहानी के दूसरे भाग में !


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मेरी सुहागरात

प्रेषक : समय मिश्रा
प्रिय दोस्तो,
यह मेरी पहली कहानी है जो मैं आप सबके साथ बाँट रहा हूँ।
यह मेरी शादी की कहानी है। यूँ तो मैंने एक दो लड़कियों की जवानी को रौंदा है परन्तु खुद की बीवी के कपड़ों को रात भर तार तार कर के मजे लेना, वो भी सबकी रजामंदी से, यह तो एक शादीशुदा ही जानता है।
मेरा नाम समय मिश्रा है। मैं आईटी प्रोफेशनल हूँ और मेरी शादी मेरे घरवालों ने ही तय की थी। शादी की सारी रस्म होने के बाद आया.... जिसका मैं बेसब्री से इन्तज़ार कर रहा था....बंद कमरे में चुदाई समारोह का .... सुहागरात का ...
मेरी बीवी 24 साल की कट्टो माल है.... उस समय उसकी ब्रा साइज़ हुआ करती थी - 30बी और आज दबा दबा के 32सी तक प्रगति हो गई है....
मेहरून रंग की साड़ी में वो क्या पटाखा लग रही थी... समझ नहीं आ रहा था... मेरी सास अपने ज़माने में क्या आइटम रही होंगी...
मेरी भाभियों ने मुझे और मेरी बीवी को एक कमरे में बंद कर दिया और बाहर से सिटकनी लगा दी...
अब मैं बंद कमरे में छुटा सांड बन गया। मैं पलंग पर बैठ गया, वो जमीन में मेरे घुटनों पर सर रख कर बैठ गई। मुझे उसकी मासूमियत देख कर लगा कि दोस्त आज छोड़ो .... यह कार्यक्रम कभी और रखते हैं। मैंने उसको आश्वासन दिया कि वो बेफिक्र रहे.... हम आज नहीं करेंगे... जब उसकी इच्छा होगी तभी शारीरिक सम्बन्ध बनाएँगे।
उसका डर धीरे धीरे जाने लगा। वैसे हमने फ़ोन से ढेर सारी बातें की हुई थी शादी से पहले। मैं उन दिनों जापान में था।
उस रात हम दोनों ने सिर्फ बातें करने का प्रोग्राम बनाया।
बातों से पता चला कि चुदाई के नाम पर सिर्फ उसको घरवालों ने (दीदी और माँ) ने सिर्फ यही बताया है कि पति जो बोले, वो कर लेना और चिल्लाना मत .... डरना मत .... और एक साफ़ चादर अपने साथ ले जाना ..... और सोने से पहले वो बिस्तर पर बिछा लेना।
मुझे दुख भी हुआ और अच्छा भी लगा ..... दुख हुआ क्यूंकि मेरी कट्टो बीवी की अँधेरे में रखा उसके अपने घरवालों ने... और अच्छा भी लगा कि अभी तक चुदी नहीं है.... और यह सील खोलने का काम मुझे ही करना है....
हमने एक दूसरे को खूब चुटकले सुनाए रात भर.... कुछ थोड़े नॉन-वेज जोक्स भी थे .... वो भी हंस रही थी... उसकी हंसी पे तो आज भी मेरा दिल मचल जाता है।
फिर करीब हमने रात के तीन बजे सोने का इन्तजाम किया... हम दोनों अगल बगल सो गए....... धीरे धीरे मैंने चिपकना शुरू किया... लंड तो टन टनाया हुआ था.... मैंने उसकी कमर में हाथ डाला.... उसको घबराहट हो रही थी पहले... पर धीरे धीरे शांत हो गई .... धीरे से कमर पकड़ के अपने पास खींचा उसको .... उसकी गांड पे हाथ रखा तो लगा कि उसने गांड को डर के मारे टाइट किया हुआ है।
मैंने उसको कहा- मुझे प्यास लगी है.....
उसने बोला कि आप ग्लास में रखा हुआ दूध पी सकते हैं....
मेरे जवाब ने उसको साफ़ बता दिया कि मुझे क्या चाहिए... मैंने कहा मुझे गाय का नहीं ...बीवी का दूध पीना है।
अब तक उसको लगा कि शायद आज इतना ही होना है सो कोइह र्ज़ नहीं पिलाने में... और उसकी माँ ने तो पहले ही बोला था कि पति जो बोले कर देना।
सो उसने ब्लाऊज़ खोला और मैंने जैसे दबोच लिया दोनों मम्मों को !
क्या मज़ा मिला दोस्तो ! थोड़ा पीने पर लगा कि उसको नीचे कुछ कुछ होने लगा है... वो टाँगें हिला रही थी.... मैंने झट से साड़ी ऊपर कर के पैंटी में हाथ डाल दिया। यह इतना जल्दी हुआ सब कुछ की वो कुछ नहीं कर पाई। उसकी दीदी ने उसको एक शेविंग रेज़र भी लाकर दिया था ताकि मुझे चिकनी चिकनी चूत मिले...
मैंने ऊँगली से उसके चूत में क्लिटोरिस को छेड़ना शुरू किया.... वो एक दम उत्तेजित हो चुकी थी.... पाँच मिनट में उसका बदन अकड़ गया और वो हिलने लगी...
उसके साथ यह पहली बार हुआ था..... उसने आज तक हस्त मैथुन नहीं किया था। अच्छा एक और अच्छी बात हुई...... जब वो हिल रही थी तो उसकी चूत से एक चिप चिपी धार भी निकली...... मैं समझ गया कि .... इसने तो भैया .... पानी छोड़ दिया..... उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी....
मुझे अच्छा लगा कि मैं उसको धीरे धीरे अपने मकसद की तरफ ला पा रहा हूँ। मैंने उसको अब नंगा कर दिया....और खुद के कपड़े भी निकाल दिए..... मैंने लाइट जला दी। मेरा लौड़ा देख कर वो हंसने लगी... उसने छोटे बच्चों का लौड़ा लटका हुआ देखा था... पर खड़ा हुआ... इतना बड़ा और मोटा नहीं देखा था.... और उसके लिए अपना छेद ही नोर्मल था... उसको लगता था कि हम लड़के लौड़े को दो टांगों के बीच में कैसे एडजस्ट करते हैं.... ऐसे कई और सवाल के साथ डर भी तो था उसके दिल में...... कि आज रानी रूपमती की इस कमरे में इज्ज़त लुट रही है.... और खुद उसकी मैया और बापू ही उसको चुदाने के लिए छोड़ गए हैं यहाँ।
उसकी चूत गीली थी... अच्छा मैं भूल गया कि मैंने लाइट जला दी थी अपने कपड़े उतारने से पहले। मैं एक रात पहले दवाइयों की दुकान से एक के वाई जेल्ली ले आया था..... वो उसको चूत में और थोड़ा गांड की छेद में लगाया.... लौड़े को चूत के मुँह में रखा.... मेरी कट्टो बीवी की साँस अटकी हुई थी.... मैंने उसको बताया कि अभी, जानू, तेरा छेद मस्ताया हुआ है... इसको अभी चोदना सही है...... उसकी हामी हुई तो लौड़ा अन्दर घुसा..... जेल्ली की वजह से आराम से सुपारा अन्दर घुस गया... एक और शाट और पूरा लौड़ा समा गया.... बीवी की तो जैसे दुनिया लूट गई .... मुंह को कपड़े से दबाया हुआ था ... फिर भी एक हलकी चीख के साथ बोली ..... मैं मर गई ... प्लीज़ निकालो इसको .... नीचे दर्द हो रहा है.....
मैंने निकाला तो देखा कि मेरा लौड़ा लाल है खून से ..... उसकी झिल्ली मैंने तोड़ दी थी .... एक जीत का एहसास लिए मैं फिर उसके दोनों हाथ दबाये तो फिर एक शाट ... फिर तो एक ट्रैक्टर जैसे खेत जोतने लगता है ... मैं भी चूत पर अपना ट्रैक्टर चला रहा था .... अब धीरे धीरे उसका दर्द भी शांत हो चुका था .... सट सट कर के लौड़ा अन्दर बाहर हो रहा था..... फिर मेरी बारी थी झड़ने की..... मैंने अंदर ही वीर्य निकाल दिया .... अन्दर से ऐसा लग रहा था कि मैं ज़माने को यह बताना चाहता हूँ कि यह मेरा वीर्य एक हस्ताक्षर की तरह है...उसकी चूत पर ...मेरा हस्ताक्षर !
अब बारी थी उसकी गांड की.... लेकिन खिड़की पर नज़र गई तो देखा एक कोने से मेरा भाई देख रहा है.......
आगे की कहानी बाद मैं बताऊंगा कि कैसे मैंने अपनी कट्टो की गांड मारी और मेरे भाई और मैंने कैसे मेरी ही बीवी से प्यार किया एक साथ। वैसे उसकी लव मैरिज़ हुई थी... और मेरे से पहले हुई थी उसकी शादी.... मैंने भी उसकी बीवी की जो बजाई थी तो उसकी तो आदत ही है अब रात में पहले भाई से फिर मेरे से चुदाने की....
घर की बात घर में.....


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